जयपुर/करौली: मुख्यमंत्री वसुन्धरा राजे समर्थकों ने असंतुष्ट खेमे के प्रमुख नेता ललित किशोर चतुर्वेदी पर मंगलवार को पलटवार किया। संसदीय सचिव भवानीसिंह राजावत ने बुधवार को कहा कि परिवार की मान-मर्यादा की आचार संहिता जितनी बहू-बेटियों के लिए होती है, उतनी ही बड़े-बुजुर्गो के लिए होती है।
राजावत ने ‘भास्कर’ के साथ बुधवार को बातचीत में असंतुष्ट खेमे के नेता को नसीहतें देते हुए कहा कि बहू-बेटियों ने तो परिवार के बड़े बूढ़ों के सम्मान में कोई कसर नहीं छोड़ी है, लेकिन ऐसे बड़े-बूढ़ों का क्या करें, जो आंगन की बात को चौराहों को चौराहों पर ले जा रहे हैं। राजावत ने कहा कि बड़े बूढ़े पहले बहू बेटियों की इज्जत तो करना सीख लें।
राजावत ने कहा कि अगर बहू-बेटियों नहीं चाहतीं तो चतुर्वेदी संसद नहीं पहुंचते। बहू-बेटी ने ही उन्हें संसद में पहुंचाकर उनका गौरव बढ़ाया है। राजावत ने कहा कि अनुशासन का पाठ पढ़ाने वाले सार्वजनिक बयानबाजियों से संगठन को क्षति पहुंचा कर अनुशासन को तार-तार कर रहे हैं। इससे पार्टी के निष्ठावान कार्यकर्ता आहत और व्यथित हैं।
राजावत ने कहा कि ठीक है, पुराने किले गौरवशाली अतीत के प्रतीक हैं, लेकिन अतीत अतीत होता है और वर्तमान वर्तमान। वर्तमान ही अपने बेहतर कामों से शानदार अतीत बनता है। राजावत ने कहा कि गौरवशाली अतीत के नाम पर तो हर कोई जीतता है, लेकिन दमखम तो इसमें है कि कोई वर्तमान को बेहतर बनाकर जीते। अगर वर्तमान बेहतर नहीं हुआ तो हमें भावी पीढ़ियां कभी माफ नहीं करेंगी।
उन्होंने कहा कि घर के बुजुर्र्गो को तो ऐसी बहू-बेटी पर गर्व करना चाहिए, जिसने बीमारू व पिछड़ेपन के कलंक को धोकर राजस्थान को विकसित राज्यों की श्रेणी में खड़ा करके विकास का नया इतिहास रच दिया है।
पढ़ेगा कौन?
अधिकारी, राजनेता और आम लोग