नई दिल्ली/मुंबई :
मुद्रास्फीति का आंकड़ा भले ही दो साल के न्यूनतम स्तर 3.52 फीसदी पर आ गया हो, उसके सूत्र क्रूड (कच्चे तेल) के पास हैं। भारतीय बास्केट में क्रूड अपने रिकार्ड स्तर 75.30 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया है। राहत की बात यह है कि हरिकेन समस्या सुलझने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड नरम पड़ा है।
भारतीय बास्केट में इससे पहले क्रूड के भाव 8 अगस्त 2006 को सर्वोच्च स्तर 75.20 डॉलर पर थे। अगस्त में जहां भारतीय बास्केट के औसत भाव 69 डॉलर थे, वहीं सितंबर में 73.12 डॉलर रहे हैं।
घाटे का दबाव
सरकार ने अब तक पेट्रोलियम कंपनियों का घाटा आम उपभोक्ता पर नहीं डाला है। कंपनियां भी ज्यादा घाटा बर्दाश्त नहीं कर पाएंगी। पेट्रोल पर प्रति लीटर 2.79 रुपए, डीजल पर 4.65 रुपए, केरोसिन पर 15.50 रुपए प्रति लीटर और एलपीजी सिलेंडर पर 178.15 रुपए का घाटा कंपनियां उठा रही हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड 80 डॉलर के निशान तक गया है। अब भी 79.67 डॉलर चल रहा है। ओपेक देश बिक्री बढ़ाने को तैयार हो गए हैं, फिर भी क्रूड की कीमतें मांग के कारण तेजी से बढ़ रही हैं।
महंगाई की दिशा
शुक्रवार को मुद्रास्फीति के आंकड़े बता रहे हैं कि खनिजों की लागत घटने व हवाई ईंधन की कीमतें कम रहने से मुद्रास्फीति 1 सितंबर को समाप्त सप्ताह में दो साल के सबसे कम स्तर 3.52 फीसदी पर आ गई है। लगातार तीसरे सप्ताह मुद्रास्फीति चार फीसदी से नीचे आई है।
कैसे घटी महंगाई
सभी उपभोक्ता वस्तुओं का इंडेक्स 0.4 फीसदी बढ़ गया है। प्राथमिक खाद्य वस्तुएं 1.3 फीसदी महंगी हो गई हैं। खाद्य पदार्थो में मछली, फल व सब्जियों, रागी और दूध की कीमतें बढ़ी हैं। बाजरा, अंडों, मक्का, मूंग और मसालों की कीमतें गिरी हैं। मुद्रास्फीति में गिरावट का प्रमुख कारण खनिज इंडेक्स में 2.4 फीसदी कमी है।
* विकास को प्रभावित किए बिना मुद्रास्फीति पर नियंत्रण के मामले में रिजर्व बैंक पहले के मुकाबले ज्यादा सतर्क है। यह एक कठिन काम है क्योंकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर वित्तीय अनिश्चितताएं बढ़ गई हैं, क्रूड आयल और कृषि जिंसों की कीमतें बढ़ रही हैं। —वाईवी रेड्डी, गवर्नर, रिजर्व बैंक