पानीपत.
बीयर पीने से पथरी निकलने की बजाय और बन सकती है। उन लोगों के लिए बेशक यह बुरी खबर है जो इस गलतफहमी के चलते बीयर गटके जा रहे हैं कि इससे गुर्दे की पथरी निकलने में मदद मिलेगी।
एमडी यूनिवर्सिटी (रोहतक) के छात्रों द्वारा दर्जनभर ब्रांडेड कंपनियों की बीयर पर शोध में सामने आया है कि इसमें आग्जैलिक एसिड होता है, जो पथरी के लिए जिम्मेदार अहम कंपोनेंट कैल्शियम आग्जलेट बनाता है। शोध के दौरान बायोसेंसर तकनीक का इस्तेमाल किया गया।
क्या है कैल्शियम आग्जलेट :
यूनिवर्सिटी के प्रो. सीएस पुंडीर का कहना है कि पथरी में कैल्शियम आग्जलेट का भाग करीब अस्सी से नब्बे फीसदी होता है। यह तत्व अघुलनशील व ब्राउन कलर का होता है। पुंडीर के मार्गदर्शन में शोधार्थी हेमंत यादव व नितिन दो वर्ष के अध्ययन से इस निष्कर्ष पर पहुंचे।
पथरी होने के कुछ अन्य कारण
(1). मरीज लंबे समय तक चारपाई पर रहे (2) किसी वजह से किडनी में इन्फेक्शन हो (3) शरीर में विटामिन ए की कमी हो जाए, (4) पैरा थाइराइड ग्रंथी की अति सक्रियता हो जाए (5) यूरिन में कैल्शियम का हाई लेवल होना, (6) गठिया (जोड़ों में यूरिक ऐसिड जमा होना), (7) पसीना ज्यादा आने से यूरिक की कंसंट्रेशन कम होना, (8) ल्यूकोनीमिया की स्थिति में।
उलट गई पहली धारणा
अभी तक आमजन व चिकित्सा जगत से जुड़े लोगों की धारणा यही रही है कि बीयर पीने से गुर्दे की पथरी यूरिन के रास्ते बाहर निकल जाती है। बीयर पीने से किडनी में हाइड्रोस्टेटिक प्रेशर डेवलप होता है। इससे किडनी फूल जाती है और यूरिन के प्रेशर में छोटी-मोटी पथरी बाहर आ जाती है।
पथरी के अन्य कारक
अमोनियम फास्फेट, कैल्शियम फास्फेट, कैल्शियम काबरेनेट, कैल्शियम आग्जलेट, यूरिक ऐसिड व यूरेट।
शोध :
बीयर में आग्जैलिक एसिड 11 मिलीग्राम प्रति लीटर से 14 मिलीग्राम तक पाया गया। यह कैल्शियम आग्जलेट बनाता है।
>> रिसर्च से साबित हुआ है कि बीयर में स्टोन कंपोनेंट होते हैं। इसकी वजह से यूरिन में आग्जलेट की मात्रा बढ़ जाती है। शोध के नतीजे बड़े चिकित्सा संस्थानों को भेजे जाएंगे।
-प्रो. सीएस पुंडीर डीन, फैक्ल्टी आफ बायोसाइंस, एमडीयू, रोहतक