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बंदूक से कमाई, कैट्स की शामत आई

चंडीगढ़. cats पंजाब में आतंकवाद के दौर में जिन आतंकवादियों ने बंदूक की नोंक पर प्रॉपर्टी बनाई और जमीनों पर अवैध कब्जे किए, उन पर अब सरकार की नजर है। जमीनें कहां-कहां और कितनी हैं, यह पता लगाने के लिए पुलिस सक्रिय हो गई है। वहीं आतंकवाद खत्म करने के नाम पर बने पुलिस कैट्स ने कितनी प्रॉपर्टी बनाई, इसका भी पता लगाने के निर्देश दिए गए हैं।

खुफिया तंत्र ने कैट्स की प्रॉपर्टी पता करने को विजिलेंस की पहल पर सभी जिला पुलिस प्रमुखों को निर्देश दिए हैं। विजिलेंस पता करना चाहता है कि पूर्व डीजीपी एसएस विर्क ने जिन 300 कैट्स की मौजूदगी का उल्लेख किया था, उसमें क्या खेल था।

इंटेलिजेंस विंग से सहयोग :
विजिलेंस ब्यूरो अब इंटेलिजेंस विंग से विर्क के कार्यकाल में आतंकवादियों को मुख्य धारा में लाने वालों की सूची भी तलब कर रहा है, जिससे खुलासा हो सके कि सुखविंदर सिंह सुक्खी जैसे कितने और आतंकी हैं, जिन्हें मृत बता कर उनका पुनर्वास किया गया।

हर एसएसपी के पास कैट :
खूंखार आतंकियों को पकड़ने या खत्म करने के लिए लगभग हर जिले का एसएसपी अपने यहां कैट रखता था। ऐसा आतंकियों की हरकतों पर नजर रखने के लिए किया जाता था। आतंकियों तक पहुंचने में कैट की मदद लेना उस समय संबंधित एसएसपीज की मजबूरी थी। हालांकि पुलिस अफसरों पर कैट के दुरुपयोग के आरोप भी लगते रहे हैं।

क्या था कैट का काम :
आतंकियों को पकड़वाने में कैट की अहम भूमिका रही है। कैट उसी को बनाया जाता था, जिसने किसी आतंकी संगठन में सक्रिय सदस्य के तौर पर काम किया हो।

पुलिस विभाग खूंखार आतंकियों व अपराधियों को पकड़वाने के लिए इनाम देता है। इसी तरह इंटेलिजेंस विंग ने भी आतंकवादियों को पकड़वाने के लिए कई कैट्स को बड़ी राशि इनाम के रूप में दिलवाई। यह इनाम उसी आतंकवादी को पकड़वाने पर दिया जाता था, जिन पर राज्य सरकार ने इनाम रखा होता था।





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