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हर रोज ठगे जाते हैं सवा दो लाख लोग

भोपाल. यदि आपसे पूछा जाए कि क्या आप साइबर क्राइम का शिकार हुए हैं, तो आपका जवाब न में होगा, लेकिन ऐसा है नहीं। पीसीओ से फोन काल करने वाला लगभग हर व्यक्ति इस क्राइम का शिकार होता है। भोपाल में हर रोज करीब सवा दो लाख लोग इसका शिकार होते हैं और उनसे लाखों रुपयों की धोखाधड़ी की जाती है।

पब्लिक काल आफिस (पीसीओ) से यदि कोई आपके मोबाइल फोन पर काल करता है, तो मोबाइल पर काल ड्यूरेशन 40 सेकंड का दिखाई देता है। लेकिन पीसीओ पर लगे मानीटर में यह पूरा एक मिनट होता है। इसके बाद दूसरे काल के भी पैसे लिए जाते हैं।

कौन पकड़ेगा:
पीसीओ के मानीटर में होने वाली गड़बड़ी को रोकने का पहला काम फोन सेवा प्रदाता कंपनी का है। कंपनी को इसे पकड़कर पुलिस को जानकारी देनी होती है, लेकिन आमतौर पर दूरसंचार कंपनियां ऐसा नहीं करती हैं।

सीआईडी के पास है साइबर सेल:
पुलिस में साइबर क्राइम का काम सीआईडी के पास है। सीआईडी के एडीजी एसके राउत कहते हैं कि लोग आमतौर पर शिकायत नहीं करते। पहले इस तरह के मामले जिले में आईटी एक्ट के तहत दर्ज होंगे और फिर जांच के लिए सीआईडी के पास आएंगे, लेकिन अभी तक किसी कंपनी या उपभोक्ता ने शिकायत नहीं की।

जागरूकता का अभाव:
आमतौर पर लोग ठगी का शिकार होने के बाद भी पीसीओ संचालक की शिकायत नहीं करते हैं। पुलिस इसे जागरूकता का अभाव मानती है।

50 सेकंड = एक मिनट:
न्यू मार्केट के एक पीसीओ से संवाददाता ने एक लोकल काल किया। पीसीओ की मशीन जब एक मिनट पूरा बता रही थी, तब तक इस संवाददाता की मोबाइल की घड़ी में 50 सेकंड हुए थे।

इसी दौरान एक बुजुर्ग आरके सिसौदिया ने वहां से सागर फोन लगाया। काल पूरा होने तक मीटर 35 रुपए 40 पैसे दिखा रहा था। फोन काटते ही यह बढ़ कर 38 रुपए 20 पैसे हो गया। उन्होंने जब बिल मांगा तो पीसीओ संचालक का जवाब था, प्रिंटर खराब है। टेलीकाम कंपनियों के अधिकारियों के अनुसार पल्स एक्सचेंज से भेजी जाती है, इसलिए उसमें गड़बड़ी नहीं हो सकती। पीसीओ संचालक काल मीटर में छेड़छाड़ कर के ग्राहकों को लूटने की कोशिश करते हैं।

नोटिस बोर्ड गायब:
नियमानुसार सभी पीसीओ पर एक नोटिस बोर्ड होना चाहिए। इस नोटिस बोर्ड पर पीसीओ का फोन नंबर, संचालक का नाम, पूरा पता, शिकायत करने के लिए संबंधित अधिकारी का नाम व फोन नंबर होना चाहिए।

अधिकतर पीसीओ से यह नोटिस बोर्ड गायब हो गए हैं। शाहपुरा में मेन रोड पर एक पीसीओ पान की दुकान पर चल रहा है। वाहनों के शोर के बीच वहां खड़े होकर बात करना मुश्किल है। इस पीसीओ पर बिल प्रिटिंग मशीन भी नहीं है।

बात करने से कतराते हैं निजी कंपनियों के अधिकारी:
राजधानी में लगे 7500 पीसीओ में से लगभग आधे निजी टेलीकाम कंपनियों के हैं। इनमें गड़बड़ी के संबंध में एयरटेल और रिलायंस के अधिकारियों से संपर्क करने पर वे टालमटोल करते रहे।

बीएसएनएल के भोपाल दूरसंचार महाप्रबंधक महेश शुक्ला ने कहा कि कोई भी व्यक्ति उनके कार्यालय में शिकायत कर सकता है। शिकायत सही पाई जाने पर पीसीओ का लायसेंस भी निरस्त हो सकता है।

कहां करें शिकायत?:
पीसीओ के बारे में कोई भी शिकायत कंपनी के कस्टमर केयर नंबर पर की जा सकती है। इसके अलावा कंपनी के कार्यालयों में भी लिखित शिकायत की जा सकती है।

40-45 सेकंड में बजता है बजर
किसी भी पीसीओ से फोन करने पर 40-45 सेकंड बात होते ही बजर बजने लगता है। बजर की आवाज इतनी तेज होती है कि दूसरी ओर की आवाज सुनाई नहीं देती। पीसीओ संचालक से पूछने पर जवाब मिलता है कि एक काल पूरा हो गया।

यदि कोई व्यक्ति कहता है कि उसे और बात करना है तो वह उस बजर को बंद कर के काल बढ़ा देता है। दरअसल, अधिकतर पीसीओ संचालकों ने काल मीटर के अलावा एक टाइमर मशीन अलग से लगा रखी है। मशीन की सेटिंग इस तरह की गई है कि 40 से 45 सेकंड काल होते ही वह तेज बजर बजाने लगती है।

गड़बड़ियां कैसी-कैसी
>> काल मीटर का प्रिंटर खराब है
>> काल मीटर तेज कर रखा है
>> बजर लगा रखा है बिल नहीं मिलता
>> टाइमर खराब है या छुपा हुआ है।





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