नई दिल्ली: प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने गुरुवार को 11वीं पंचवर्षीय योजना अवधि में शिक्षा बजट में चार गुना बढ़ोतरी का ऐलान करते हुए इस क्षेत्र में निजी पहल के विस्तार पर बल दिया। उन्होंने विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में फीस बढ़ाने का संकेत देते हुए लक्ष्यों को हासिल करने के लिए समयबद्ध कार्ययोजना का आह्वान भी किया।
प्रधानमंत्री ने योजना आयोग की पूर्ण बैठक में समापन भाषण देते हुए कहा कि योजना अवधि में केंद्र सरकार शिक्षा क्षेत्र में 2.5 लाख करोड़ रुपए खर्च करेगी जो 10 वीं योजना की तुलना में चार गुना ज्यादा है। इससे कुल योजना खर्च में शिक्षा का हिस्सा 7.7 फीसदी से बढ़कर 19.4 फीसदी हो जाएगा जो सकल घरेलू उत्पाद का छह फीसदी होगा। सरकार आईआईटी और आईआईएम जैसे संस्थानों में निजी निवेश की संभावनाएं भी तलाश रही है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि चरणबद्ध तरीके से वाजिब स्तर तक फीस बढ़ाने के प्रस्ताव पर हमें गंभीरतापूर्वक विचार करना चाहिए, लेकिन साथ ही छात्रवृत्ति और शिक्षा ऋण की योजनाएं भी लागू की जानी चाहिए ताकि कोई छात्र वित्तीय कठिनाइयों की वजह से शिक्षा से वंचित न रहे। बैठक में योजना आयोग के उपाध्यक्ष मोंटेक सिंह अहलूवालिया के अलावा वरिष्ठ कैबिनेट मंत्री मौजूद थे।
अल्पसंख्यकों और पिछड़ों पर विशेष ध्यान : प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार अल्पसंख्यकों, अनुसूचित जाति- जनजातियों और पिछड़ों की शिक्षा पर खास ध्यान देगी। इसके लिए माध्यमिक और उच्च शिक्षा के सरकारी कार्यक्रमों में सच्चर कमेटी की सिफारिशों पर गंभीरता से विचार करने की जरूरत है।
फीस बढ़ाने के पीछे तर्क :
* उच्च शिक्षा पर होने वाला परिचालन खर्च 20 फीसदी तक वसूला जा सकेगा।
* स्नातक और स्नातकोत्तर कक्षाओं के छात्र अभी शिक्षा के कुल खर्च का महज पांच फीसदी का भुगतान करते हैं। कई वर्र्षाे से फीस बढ़ाई नहीं गई है।