जोधपुर:
जोधपुर डिस्कॉम को मिल रही 300 लाख यूनिट बिजली का 40 प्रतिशत यानि 120 लाख यूनिट प्रतिदिन कृषि पर खर्च हो रहा है। अक्टूबर से जनवरी माह रबी की फसल का होता है जिसे बिजली के हिसाब से पीक सीजन माना जाता है। उस समय 150 लाख यूनिट बिजली तक कृषि जोन को देनी पड़ेगी।
पूर्व में कृषि जगत में बिजली की खपत कम होने का मुख्य कारण मारवाड़ की परंपरागत फसलें ईसबगोल, रायड़ा व बाजरे की ही थी जिसे तीन सिंचाई की ही जरूरत होती थी। जिस कारण बिजली 100 लाख यूनिट से भी कम खर्च होती थी। वर्तमान में इन फसलों को छोड़कर किसान गेहूं और जौ की ओर बढ़ रहे हैं। जोधपुर कृषि जोन में 30 हजार हैक्टेयर क्षेत्र में गेहूं की पैदावार हो रही है तो उसे कम से कम 6 सिंचाई की जरूरत पड़ेगी। किसानों को गिरते भूजल में अधिक पानी की जरूरत पड़ रही है, इस कारण बिजली की खपत परंपरागत फसलों से दोगुनी ज्यादा होने लगी है।
इंजीनियरों का मानना है कि डिस्कॉम एक घंटा भी अधिक बिजली देता है तो उसे 18 लाख यूनिट अतिरिक्त बिजली खर्च करनी पड़ती है। इसका असर बिजली कटौती के रूप में अन्य क्षेत्र को भुगतना पड़ता है।
* पूर्व में 10 से 15 हैक्टेयर में होने वाली गेहूं की पैदावार का रकबा बढ़कर 30 हजार हैक्टेयर तक पहुंचा है। इसमें पानी के साथ बिजली की खपत भी दोगुनी होगी।
— दयालसिंह चौधरी, संयुक्त निदेशक, कृषि विभाग
* रबी के सीजन में बिजली की खपत बढ़ेगी। खरीफ में जहां 5 घंटे बिजली देनी पड़ रही है वो रबी में 6 घंटे देने से कुछ खपत बढ़ेगी। यही डिस्कॉम की नजर में बिजली खपत का पीक टाइम होता है, इसके लिए अन्य राज्यों से बिजली खरीदकर और कुछ स्थानों पर कटौती करके काम चलाया जाएगा।
— एसआर बसंल, सीएमडी, जोधपुर डिस्कॉम