धौलपुर:
अनुसूचित जनजाति में आरक्षण लेने के लिए राजस्थान के गुर्जर दो अक्टूबर को गांधी जयंती के दिन प्रदेशभर की जेलें भरेंगे। इस दिन सातों संभाग मुख्यालयों पर एक-एक लाख लोग गिरफ्तारी देंगे। इससे पहले आंदोलन की रणनीति बनाने के लिए 18 सितंबर को जयपुर में आरक्षण समिति के कोर ग्रुप की बैठक होगी।
गुर्जर आरक्षण आंदोलन के नेता कर्नल किरोड़ीसिंह बैसला ने गुरुवार को यहां से 37 किलोमीटर दूर बीहड़ों में बाबू महाराज के स्थान पर महापंचायत में यह घोषणा की। बैसला ने चोपड़ा कमेटी का कार्यकाल बढ़ाए जाने के बारे में कहा कि वे इससे कतई सहमत नहीं हैं। फिर भी आरक्षण की चिट्ठी के साथ कमेटी की रिपोर्ट जरूरी है। इससे पहले लगभग सभी गुर्जर वक्ताओं ने मंच से तीन महीने में आरक्षण की चिट्ठी नहीं भेजने को लेकर वसुंधरा सरकार को जमकर कोसा। चोपड़ा कमेटी का कार्यकाल बढ़ाए जाने को गुर्जरों के साथ धोखा बताया और 26 कुर्बानियों का बदला लेने का संकल्प लिया।
मजबूरी में संघर्ष की घोषणा : कर्नल किरोड़ीसिंह को मजबूरी में मंच पर जेलभरो आंदोलन की घोषणा करनी पड़ी। भाषण की शुरुआत के साथ ही बैसला ने कहा कि सरकार ने चोपड़ा कमेटी का जो कार्यकाल बढ़ाया है, उससे वे सहमत नहीं हैं। उन्होंने आरक्षण के काम को पूरा करने के लिए जनसमुदाय से एक माह का समय मांगा।
भीड़ ने पुरजोर शब्दों में इसका विरोध किया और मंच पर ही आंदोलन की घोषणा करने को कहा। इस पर बैसला ने कहा कि यदि कमेटी की आधी-अधूरी रिपोर्ट से काम बिगड़ जाए तो उन्हें दोष मत देना। फिर भी भीड़ शांत नहीं हुई और बैसला को मजबूरन जेल भरो आंदोलन की घोषणा करनी पड़ी। इस दौरान हालात इस कदर बिगड़ गए कि बैसला न तो आगे की पूरी रणनीति ही बता पाए और न ही अपना भाषण पूरा कर सके।
बंद कमरे में गिले-शिकवे : महापंचायत की पूर्व संध्या पर धौलपुर के पूर्व विधायक जसवंतसिंह के निवास पर बंद कमरे में हुई मीटिंग में नेताओं ने जमकर भड़ास निकाली। आंदोलन की रणनीति रात को ही तैयार हो गई थी। इसमें गुर्जर नेताओं ने बैसला को नेता तो माना, लेकिन उन पर अंकुश रखने के लिए 21 सदस्यीय संचालन समिति भी बना दी।
इस समिति का संयोजक किरोड़ी सिंह बैसला को बनाया गया है। इसमें शामिल सदस्यों में प्रहलाद गुंजल, हरिसिंह महवा, अतर सिंह भड़ाना, रूपसिंह, नगर के पूर्व विधायक गोपी गुर्जर प्रमुख हैं। तीन सदस्य कर्नल बैसला तय करेंगे।
मुख्यमंत्री और कुटुम्ब पर बरसे नेता :
* वसुंधराराजे के पूर्वजों ने झांसी की रानी लक्ष्मीबाई को घेर कर मरवाया था, हम उसे छोड़ेंगे नहीं।
-रामवीरसिंह विधूड़ी, विधायक दिल्ली।
* मैंने तो पहले भी विश्वास नहीं किया था। लेकिन कर्नल ने उस पर भरोसा किया। हमने कर्नल को कहा था कि इस मुख्यमंत्री पर विश्वास मत करो।
- प्रहलाद गुंजल, विधायक रामगंजमंडी
* वसुंधरा सरकार ने गुर्जरों के साथ धोखा किया है। हम सरकार को चंबल नदी में बहा देंगे।
-अतरसिंह भड़ाना, विधायक बयाना
* गुर्जरों को जागरूक होने की जरूरत है।
-एदलसिंह कंसाना, पूर्व मंत्री मध्यप्रदेश
* यह सरकार छलकपट की राजनीति करती है। इससे सावधान रहने की जरूरत है।
-सुजानसिंह, पूर्व जिला प्रमुख , झालावाड़
* यह सरकार चौपड़ा कमेटी का कार्यकाल बढ़ाकर गुर्जरों को बहला रही है। 15 दिसंबर के बाद चुनाव में एक साल रह जाएगा। फिर कोई घोषणा हो नहीं पाएगी। इसलिए भरोसा करने की जरूरत नहीं है बल्कि लड़ाई लड़ने की जरूरत है।
-गोपी गूर्जर, पूर्व विधायक नगर
कर्नल ही सर्वमान्य नेता
महापंचायत में जन समुदाय ने कर्नल किरोड़ीसिंह बैसला को ही अपना सर्वमान्य नेता माना। मंच पर वक्ताओं ने भी कर्नल के नेतृत्व में ही आरक्षण की लड़ाई लड़ने का ऐलान किया।
मंच पर भिड़े गुर्जर नेता
हरियाणा के पूर्व मंत्री करतारसिंह भड़ाना का मंच स्थल से संबोधन में नाम नहीं लिए जाने पर उन्होंने इसे अपना अपमान माना और आपत्ति जताई। इस पर मंच संभाल रहे पूर्व विधायक जसवंत सिंह गुर्जर, विधायक अतरसिंह भड़ाना, प्रहलाद गुंजल ने शांत कराने का प्रयास किया। इस दौरान भडाना के समर्थकों ने मंच पर धक्का-मुक्की शुरू कर दी। करीब बीस मिनट तक मंच पर हंगामे का माहौल रहा। विरोध शांत होने के बाद ही प्रहलाद गुंजल भाषण दे सके।
पहले नेता खाएंगे लाठी-गोली
सांसद सचिन पायलट ने कहा कि आंदोलनों में हमेशा गरीब का ही बेटा क्यों मरता है? और उसी का घर क्यों उजड़ता है? हम नेताओं के परिवार और कुटुम्ब का कोई आदमी कभी क्यों नहीं मरता। उन्होंने कहा कि आगे के किसी भी आंदोलन में समाज के लिए लाठी, गोली अब वे खाएंगे। बाद में प्रहलाद गुंजल, करतारसिंह भड़ाना, अतर सिंह भड़ाना और जसवंत सिंह गुर्जर ने भी इस संकल्प को दोहराया।
नाराज होकर चले गए नेता
मंच पर अव्यवस्था होने के कारण सांसद सचिन पायलट, उनकी मां रमा पायलट सहित कई नेता बीच में ही उठकर चले गए। इनमें कांग्रेस विधायक गोविंदसिंह गुर्जर तो भाषण भी नहीं दे पाए।
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