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Madhya Pradesh
Gwalior Gwalior ग्वालियर. इंदिरा गांधी ओपन यूनिवर्सिटी (इग्नू) एवं भोज (मुक्त) विश्वविद्यालय द्वारा संचालित दूरस्थ शिक्षण पद्धति की तर्ज पर जीवाजी विश्वविद्यालय के दूरस्थ शिक्षण संस्थान ने भी देशभर में नेटवर्क फैलाने की योजना बनाई है। इसके तहत संस्थान देशभर में अध्ययन केन्द्र खोलेगा, साथ ही आडियो-विजुअल शैक्षणिक पद्धति से छात्रों को अध्ययन कार्य कराएगा।
यह निर्णय संस्थान की सलाहकार समिति ने लिया है। गत दिवस हुई समिति की बैठक में सदस्यों का कहना था कि दूरस्थ शिक्षण पद्धति की उपयोगिता बढ़ती जा रही है। अन्य विश्वविद्यालयों ने इस क्षेत्र में काफी सफलता पाई है।
इससे दूर-दराज के छात्रों को जहां लाभ मिलेगा, वहीं विवि की आर्थिक स्थिति में भी सुधार होगा। विगत वर्षो में समय पर परीक्षा न होने और परीक्षा परिणाम देरी से आने पर सदस्यों ने नाराजगी जताई। उनका कहना था कि यदि आगामी वषरे में परीक्षा और परिणाम समय पर नहीं हो सके तो संस्थान की विस्तार योजना पर विपरीत असर पड़ेगा।
अंचल में अध्ययन केन्द्र खोलने की योजना के तहत प्राप्त पांच आवेदनों पर भी विचार किया गया। तीन आवेदन जिले के आसपास के महाविद्यालयों से प्राप्त हुए थे जबकि सुमावली और बानमोर से एक-एक आवेदन।
सदस्यों का कहना था कि संस्थान का मुख्यालय विवि परिसर में है, इसलिए विवि के आसपास अध्ययन केन्द्र खोलना उचित नहीं होगा। आखिर तीनों प्रस्ताव खारिज कर दिए गए। सुमावली और बानमोर के प्रस्ताव स्वीकृत करते हुए कुलपति व कुलसचिव की सहमति हेतु अग्रेषित किए गए।
आडियो-विजुअल शैक्षणिक पद्धति हेतु डेढ़ लाख कीमत के उपकरण खरीदने का निर्णय भी लिया गया। बैठक में संस्थान के डायरेक्टर डॉ. आरपी पाण्डे, डिप्टी डायरेक्टरद्वय डॉ. आरजे राव व डॉ. हेमंत शर्मा के अलावा सलाहकार समिति के सदस्य डॉ. केके कौल, वित्ताधिकारी एसके गुप्ता एवं डिप्टी रजिस्ट्रार अजय वर्मा उपस्थित थे।
समय के अनुरूप बदलना होगा
>> वर्तमान में दूरस्थ शिक्षण पद्धति की उपयोगिता को देखते हुए विवि प्रशासन भी संस्थान को देशभर में फैलाना चाहता है। इसी क्रम में बेहतर कार्य योजना बनाने पर जोर दिया जा रहा है।
प्रो. एके कपूर, कुलपति