बीकानेर:
दूरसंचार विभाग के महाप्रबंधक के कक्ष में प्रवेश से पहले हिंदी में काम करने की सीख देने वाली दो तख्तियां लगी है। जवाहरलाल नेहरू और मोरारजी देसाई के कहे वाक्यों को लिखने में अनावश्यक विराम चिह्न् लगाए गए हैं और गलत शब्दों का चयन किया गया है। इससे भी बुरे हाल रेलवे के हैं।
स्टेशन के द्वितीय द्वार से प्रवेश करेंगे तो हर कदम पर हिंदी की दुर्गत होती मिलेगी। सबसे पहले डिजीटल-डिस्प्ले बोर्ड पर चल रहे शब्दों की खामियां पकड़ में आएंगी और अंदर प्रवेश करते ही दायीं ओर दीवार पर नि: शुल्क हिंदी सीखें के आगे विस्मयादिबोधक चिह्न् लगा नजर आएगा। ऐसे कई उदाहरण रेलवे स्टेशन पर मिल जाएंगे और फिर रेल और दूरसंचार विभाग ही क्यों। इस तरह राजभाषा के लिए प्रयास करने का दम भरने वाले बैंकों में इस तरह के उदाहरण जगह-जगह मिल जाएंगे।
ये ऐसे विभाग हैं जहां हर साल राजभाषा पखवाड़ा मनाया जाता है और कई गतिविधियां आयोजित की जाती है। राजभाषा पखवाड़े के दौरान हिंदी के विषय विशेषज्ञों को बुलाया जाता है। समय-समय पर ये विशेषज्ञ हिंदी सुधारने के सुझाव भी देते हैं लेकिन अगले राजभाषा-अभियान तक इन्हें भुला दिया जाता है।
जस्सूसर गेट के पंजाब नेशनल बैंक में पिछले दो साल से हिंदी भाषा को अपनाने के लिए वाक्य लिखे गए हैं लेकिन इनकी गलतियां यहां आने वाले उपभोक्ताओं द्वारा बता देने के बाद भी अभी तक नहीं सुधारी गई है। कमोबेश हर बैंक में इस तरह की स्थिति मिल सकती है।
आंबेडकर सर्किल की स्टेट बैंक ऑफ बीकानेर एंड जयपुर की शाखा में लगभग दस स्थानों पर कृपया ग्राहक अपना मोबाइल का शाखा में सरूइच बंद रखें लिखा है। रोचक तथ्य तो यह है कि यह शाखा प्रबंधक के नाम से लिखा गया है। शाखा प्रबंधक के नाम से निकाले गए इस अटपटे आदेश को लोग पढ़ते हैं और मुस्कुराते हैं। यहां उनसे कोई सवाल करने वाला नहीं है कि जब आपको हिंदी लिखनी ही नहीं आती है तो हिंदी में भरे हुए आवेदन-पत्रों को समझेंगे कैसे।