हिंदी दिवस विशेष. हिंदी की नई पीढ़ी बहुत सक्षम है। लिखने-पढ़ने वालों की इस पीढ़ी के पास बेहतर औजार भी हैं। उसका फलक बड़ा है, क्योंकि उसे संसार को ज्यादा व्यापक रूप से देखने का अवसर मिला है। उसे इंटरनेट जैसा सशक्त माध्यम मिल गया है, जिसने दुनिया को उसकी मुट्ठी में समेट दिया है। हिंदी की ताकत भी बढ़ रही है।
किसी जमाने में टॉप टेन अखबारों में अंग्रेजी अखबारों का वर्चस्व होता था, लेकिन आजकल हिंदी अखबार छाए रहते हैं। लोगों की क्रयशक्ति बढ़ने से हिंदी की पुस्तकों-पत्रिकाओं की बिक्री भी बढ़ी है। इन सब के बीच युवा पीढ़ी का सृजन भी एक महत्वपूर्ण उपलब्धि की तरह है, जो हिंदी के भविष्य को लेकर आश्वस्त करता है।
विदेशों में भी हिंदी का प्रसार बढ़ रहा है। विदेश में रहने वाले हिंदी लेखकों पर साहित्यिक पत्रिकाओं के अंक केंद्रित किेए जा रहे हैं। व्यापार उद्योग जगत में भी हिंदी का प्रभाव बढ़ रहा है। मल्टी नेशनल कंपनियां तक आजकल हिंदी में विज्ञापन देने लगी हैं, क्योंकि उन्हें हिंदी की ताकत का पता चल गया है। वे जान गई हैं कि हिंदी में विज्ञापन दिए बिना इस देश के बहुसंख्य लोगों तक अपनी बात नहीं पहुंचाई जा सकती है।
हिंदी का यह विशाल पाठक वर्ग ही हिंदी की सबसे बड़ी ताकत है। विदेशी कंपनियां हिंदी के मीडिया व्यवसाय में निवेश करने को जिस तरह उत्सुक हैं, उससे स्पषट है कि उन्हें हिंदी की ताकत का अंदाजा मिल गया है। इंटरनेट ने हिंदी के प्रसार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। नेट पर हिंदी की साइट्स बढ़ रही हैं और उन साइट्स पर जाने वाले पाठकों की संख्या में भी तेजी से वृद्धि हो रही है।
-श्री कालिया भारतीय ज्ञानपीठ के कार्यकारी निदेशक और ‘नया ज्ञानोदय’ पत्रिका के संपादक हैं।