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Chhattisgarh
Bilaspur Bilaspur बिलासपुर. अपनी जमीन बचाने के लिए कोटा क्षेत्र के आदिवासियों ने गुरुवार को कलेक्टोरेट पहुंचकर कलेक्टर और डीएफओ को घेर लिया। उन्होंने क्षेत्र के प्रभावशाली लोगों पर उनकी जमीन हड़पने और इसमें वन विभाग के अधिकारी-कर्मचारियों की मिलीभगत होने का आरोप लगाया।
कोटा ब्लाक की पंचायत उपका के ग्राम दैहारीपारा सहित मिट्ठू नवागांव, कोनचरा, भेलवाटिकरी, लूफा आदि गांवों के लगभग ढाई सौ आदिवासी आज लगभग 11.30 बजे कलेक्टोरेट पहुंच गए। इनमें बैगा, धनुहार, साता आदिवासी शामिल थे।
कई लोग बकायदा तीर-कमान से लैस होकर पहुंचे थे। इनकी अगुवाई एकता परिषद से जुड़े ज्ञानधर शास्त्री कर रहे थे। गांव वालों के आने की सूचना मिलने पर विधायक बलराम सिंह ठाकुर और विधायक रेणु जोगी के प्रतिनिधि के तौर पर कांग्रेस नेता अनिल टाह भी वहां पहुंच गए।
जिस समय ये सारे लोग वहां पहुंचे, कलेक्टर सुबोध सिंह बैठक ले रहे थे। वहां उपस्थित कर्मचारियों ने गांव वालों को इंतजार करने को कहा, लेकिन गांव वाले इतने आक्रोशित थे कि वे सीधे बैठक स्थल पर पहुंच गए। इसके बाद श्री सिंह और टाह के नेतृत्व में कुछ लोगों ने अंदर जाकर कलेक्टर और डीएफओ एसडी बड़गैया से बाहर आकर चर्चा करने की मांग की।
स्थिति देखकर कलेक्टर व डीएफओ बैठक के बीच से ही बाहर आए और लोगों की बात सुनी। इस दौरान भीड़ ने उन्हें घेर लिया। उनका आक्रोश खासतौर पर वन विभाग के अधिकारियों के प्रति था। गांव वालों ने बताया कि वन विभाग के अफसर गांव के कुछ प्रभावशाली लोगों के साथ मिलकर उन पर जुल्म ढा रहे हैं। उनकी मक्के और धान की खड़ी फसल चरवा दी गई।
इसके बाद भी जी नहीं भरा, तो उन्हें घर छोड़कर भाग जाने को धमकाया जा रहा है। आदिवासी परिवार वहां पर कई दशकों से खेती कर रहे हैं। इसके अलावा उनके द्वारा कटहल, नीबू, आम आदि के पेड़ भी अपनी जमीन पर लगाए गए हैं।
उन्हें बेचकर भी वे अपनी जीविका चलाते हैं। इसके बाद भी वन विभाग के अधिकारी-कर्मचारी उन्हें बेदखल करने के लिए उनकी जमीन पर जबरन पौधरोपण, गड्ढा खुदवाना, फसल चराने की कार्रवाई पिछले दो सालों से कर रहे हैं।
इस संदर्भ में वन विभाग के एसडीओ, रेंजर, बेलगहना चौकी के थाना प्रभारी के साथ संयुक्त तौर पर बैठक भी की गई थी। इसके बाद भी उनकी फसल चरा दी गई। गांव वालों का कहना था कि केंद्र सरकार द्वारा 13 दिसंबर 2006 को वन विधेयक मान्यता कानून पास किया गया है।
साथ ही प्रदेश शासन ने भी जमीन के कब्जाधारी वनवासियों को पट्टा देने की घोषणा की है। इसके बाद भी उनकी जमीन छीनने की कोशिश की जा रही है। गांव वालों ने ऐसे लोगों पर कार्रवाई करने अन्यथा उग्र आंदोलन की चेतावनी दी।
डीएफओ से लिया लिखित में
गांव वालों के तेवर देखकर डीएफओ ने उन्हें लिखित में कार्रवाई करने का आश्वासन दिया। इसमें वन विभाग के डिप्टी रेंजर अली खान और समीन खान पर कार्रवाई और तबादला, पुराने कब्जे न हटाने और क्षतिपूर्ति देने की बात कही गई है। गांव वालों ने स्थानीय कुछ लोगों और कांग्रेस नेताओं के खिलाफ भी नामजद शिकायत कर कार्रवाई की मांग की है।