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Chhattisgarh
Bilaspur Bilaspur बिलासपुर. छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट की युगलपीठ ने मामा- भांजा तालाब को पाटने के मंगलवार के अपने आदेश को बदलते हुए नगर निगम को उसका सौंदर्यीकरण करने का आदेश दिया है। शहर की बुनियादी समस्याओं पर दायर जनहित याचिका की सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने नगर निगम एवं रेलवे को तालाब में गंदे पानी की निकासी रोकने के लिए संयुक्त पहल करने कहा है।
गुरुवार को शासन की ओर से हाईकोर्ट के उस आदेश पर पुनर्विचार के लिए आवेदन किया गया, जिसमें गंदगी व प्रदूषण के चलते तालाब को पाटने का आदेश दिया गया था। मंगलवार को हाईकोर्ट ने निगम आयुक्त एमए हनीफी को तालाब को पाटने का आदेश देते हुए उसका खर्चा तालाब के स्वत्वाधिकारी से वसूलने कहा था।
हाईकोर्ट ने जनहित याचिका की सुनवाई करते हुए तालाब की स्वत्वाधिकारी श्रीमती गोदावरी शेष को नोटिस देने का आदेश दिया है। हाईकोर्ट ने आदेशित किया कि जनहित में क्यों न तालाब को शासन में सम्मिलित कर लिया जाए?
जल स्त्रोतों के संरक्षण के लिए क्या है नियम.
संविधान के अनुच्छेद 51 जी के अंतर्गत नदी, नाले,जलाशय तथा पानी के अन्य स्त्रोतों के संरक्षण की जिम्मेदारी सरकार और नागरिकों की है। इस सिलसिले में सुप्रीम कोर्ट ने समय-समय पर फैसला भी दिया है। राज्य शासन ने इसी परिप्रेक्ष्य में तालाब पाटने के हाईकोर्ट के फैसले पर पुनर्विचार के लिए आवेदन प्रस्तुत किया।