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Chhattisgarh
Raipur Raipur रायपुर. कांकेर के आदिवासी नेता पूर्व केंद्रीय मंत्री अरविंद नेताम ने आज भाजपा से चार साल पुराना नाता तोड़ लिया। उन्होंने अपना इस्तीफा भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष को भेज दिया। वे भाजपा में अपनी उपेक्षा से नाराज थे। उन्होंने अपने इस कदम को ‘आदिवासी स्वाभिमान’ की संज्ञा दी।
श्री नेताम ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि उनके तीन दशक के राजनीतिक अनुभव का पार्टी ने उपयोग नहीं किया। जबकि वे इसी शर्त पर कांग्रेस से भाजपा में आए थे। वे केंद्र और राज्य की योजनाओं को लेकर आदिवासियों के बीच जनजागरण अभियान चलाने जैसी जिम्मेदारी निभाना चाहते थे लेकिन उनकी पूछ-परख नहीं की गई। उन्होंने कहा कि भाजपा में प्रदेश और राष्ट्रीय स्तर पर आदिवासी नेतत्व का अभाव है।
हालांकि उन्होंने भाजपा और संघ की सराहना करते हुए कहा कि वहां राष्ट्रीय स्तर के मुद्दों पर चर्चा जरूर की जाती है। छग में निरीह आदिवासियों की हत्याओं, बलात्कार व शोषण जैसे मामलों पर खामोशी ओढ़ लेने के मामले में उन्होंने कहा कि यह सच नहीं है। इन मुद्दों पर उन्होंने कई दफे मुख्यमंत्री डा. रमनसिंह से मिलकर विरोध जताया। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस मुद्दे पर वे बुधवार को राज्यपाल से भी मिले हैं।
सलवा-जुडूम पर उन्होंने कहा कि वे पहले ही आशंका जता चुके थे कि स्वच्छंद आदिवासियों को कैंपों में रखना और फिर उन्हें वापस मूल निवास पर भेजना संभव नहीं होगा। उन्होंने पूर्व केंद्रीय मंत्री विद्याचरण के साथ मिलकर तीसरा मोर्चा बनाने की संभावना से साफ मना कर दिया। असंतुष्ट भाजपा विधायकों के बारे में उन्होंने कहा कि वोटर और नेता का असंतुष्ट या नाखुश होना नई बात नहीं है।
पार्टी बदलना नई बात नहीं :
आठवें दशक तक कांग्रेस में धाकड़ नेता के रूप में जाने वाले श्री नेताम के लिए पार्टी बदलना नई बात नहीं है। उनका राजनीतिक पतन तब प्रारंभ हुआ जब केंद्र में पीवी नरसिम्हाराव की सरकार थी। श्री राव ने हवाला के आरोप में जिन नेताओं को टिकट से वंचित किया था उनमें श्री नेताम भी थे।
हालांकि वे पत्नी छबीला नेताम को सांसद टिकट दिलाने और फिर जीताने में भी सफल रहे। उसके बाद वे पार्टी में उपेक्षा महसूस करने लगे और बसपा में चले गए। बसपा की टिकट पर वे जांजगीर और कांकेर से लोकसभा चुनाव लड़े पर हार गए।
बसपा से मोहभंग होने के बाद वे वापस कांग्रेस में लौट आए। छग बनने के बाद जोगी सरकार में भी उपेक्षा से नाराज होकर 2003 में एनसीपी में चले गए और फिर लोकसभा चुनाव के दौरान वे भाजपा में शामिल हो गए।
जल्दी ही कांग्रेस प्रवेश - महंत
पीसीसी अध्यक्ष चरणदास महंत ने दैनिक भास्कर से कहा कि श्री नेताम का 2-3 दिनों में कांग्रेस प्रवेश हो जाएगा। श्री नेताम ने भी कहा कि श्री महंत सालभर से उन्हें कांग्रेस में लाने के लिए कोशिश कर रहे हैं। पूर्व मुख्यमंत्री और अजा-जजा आयोग के राष्ट्रीय अध्यक्ष अजीत जोगी ने भी पार्टी आलाकमान सोनिया गांधी से मिलकर श्री नेताम को कांग्रेस प्रवेश पर सहमति दे दी है।
पटेल, भारद्वाज के बाद नेताम
खरसिया के पूर्व विधायक व अजरुन सिंह के करीबी लक्ष्मी पटेल, पलारी के पूर्व विधायक डा. रामलाल भारद्वाज के कांग्रेस में लौटने के बाद नेताम के प्रवेश को पीसीसी की पुराने कांग्रेसियों को वापस लाने की मुहिम से जोड़कर देखा जा रहा है। पूर्व केंद्रीय मंत्री विद्याचरण शुक्ला और पवन दीवान को भी पार्टी में लाने की कोशिशें हो रही हैं।