इंदौर. विभिन्न सरकारी विभागों और नगर निगम से वर्षो पहले रिटायर हो चुके अनेक कर्मचारी आज भी कुर्सी पर जमे हैं और हुकुम चला रहे हैं। यह अलग बात है कि फाइलों पर दस्तखत कोई और करता है। नौकरी में नहीं होने के बाद भी गोपनीय फाइलें उनके पास होकर जाती हैं।
साथी कर्मचारी और अन्य लोग उनसे त्रस्त हैं लेकिन अधिकारियों के कृपापात्र होने के कारण खुलकर शिकायत भी नहीं करते। कर दें तो कुछ बिगड़ता भी नहीं।
फाइल आगे नहीं बढ़ती उनके बिना
पन्नालाल दशोरे डेढ़ साल पहले तक कलेक्टोरेट में अधीक्षक थे। उसके बाद भी सारा कामकाज संभाले हैं। स्थापना संबंधी फाइल हो या कोई और गोपनीय कागज, उनके देखे बगैर नहीं बढ़ता।
कहने को एस.आर. भील अधीक्षक हैं लेकिन अधिकारी श्री दशोरे से ही सलाह लेते हैं। अधीक्षक की ओर से ज्यादातर पत्र वे ही जारी करते हैं लेकिन हस्ताक्षर श्री भील के होते हैं। उन्हें रेडक्रॉस से पांच हजार रुपए हर महीने दिए जाते हैं। रिकॉर्ड में भी वे वहीं काम कर रहे हैं।
छह सौ को बगैर काम वेतन
निगम प्रशासन ने 2300 सफाईकर्मियों की जगह 3110 नियुक्तियां कर दीं जिनमें 768 गैर-वाल्मीकि हैं। उसमें से छह सौ से ज्यादा लोग राजनीतिक संरक्षण के चलते बगैर काम वेतन पा रहे हैं। एक मस्टरकर्मी का वेतन 2350 रुपए प्रतिमाह होता है यानी निगम के खजाने में 14 लाख से ज्यादा की सेंधमारी हर महीने।
सफाई मजदूर मोर्चा के अध्यक्ष प्रताप करोसिया ने नगरीय प्रशासन विभाग को 3.90 करोड़ के वेतन घोटाले की शिकायत की है। उनके अनुसार अशोक तुकाराम, अशोक कन्हैयालाल, अजरुन गोवर्धन, बालमुकुंद कौशल, बालचंद गंगाराम, दामोदर जैसे 614 लोग बगैर काम वेतन ले रहे हैं।
माल जब्ती से छोड़ने तक उनके भरोसे
खाद्य विभाग में सिलेंडर, केरोसिन, पेट्रोल आदि राजसात करने से छोड़ने तक के काम दो साल पहले सहायक ग्रेड-2 से रिटायर शंकरलाल बागोरा कर रहे हैं। जानकार बताते हैं छापों के बाद के सारे गोपनीय काम वे ही करते हैं।
अधिकारी भी उनकी सलाह से निर्णय लेते हैं। वे किसके आदेश से काम करते हैं और बदले पैसे कहां से दिए जाते हैं? इसका जवाब किसी के पास नहीं। जिम्मेदार लोग कहते हैं वे हमारी सेवा में नहीं।
अपर कलेक्टर से मिलने से पहले इनसे मिलें
अपर कलेक्टर व सीईओ, जिला पंचायत आशुतोष अवस्थी से मिलने के पहले आठ साल पहले रिटायर हो चुके स्टेनो टी.आर. भौर से मिलना पड़ता है। उनका सरकारी कामकाज में खासा दखल है।
उन्हें हरियाली प्रोजेक्ट में समन्वयक के रूप में संविदा भर्ती बताकर वेतन दिया जा रहा है। इसी तरह एक साल पहले रिटायर जी.एल. मारू भी काम कर रहे हैं। उन्हें वेतन कौन देता है, अधिकारी नहीं बता पाए। दोनों स्टेनो सह निजी सलाहकार हैं।
अब तक कुर्सी नहीं छोड़ी
निगम परिषद कार्यालय के सीनियर क्लर्क समीरमल जैन 8 फरवरी को रिटायर होने के बाद भी काम कर रहे हैं। उनके पास फिलहाल उद्यान एवं स्थापना संबंधित काम है।
अधीक्षक काम में हाथ बंटा रहे हैं
>> पूर्व अधीक्षक श्री दशोरे रेडक्रॉस में काम करते हैं और थोड़ी-बहुत सहायता वर्तमान अधीक्षक को करते हैं। अन्य विभागों में रिटायर लोगों के काम करने की जानकारी नहीं है। ऐसा है तो जरूर देखूंगा।
- विवेक अग्रवाल, कलेक्टर
तत्काल हटाएंगे
>> सेवानिवृत्त हो चुके लोगों को काम नहीं करना चाहिए। उन्हें तत्काल प्रभाव से हटाएंगे।
- नीरज मंडलोई, आयुक्त नगर निगम
रोज हाजिर, रिटायर जिला नाजिर
तीन साल पहले बतौर जिला नाजिर रिटायर हरविलास गोयल आज भी सुबह से शाम तक दफ्तर में काम कर रहे हैं। हालांकि हर जगह दस्तखत नाजिर विजय मिश्रा के होते हैं। उनके लिए दफ्तर में सीट भी है और सभी महत्वपूर्ण फाइलें उनके हाथ से गुजरती हैं। भले ही वे सरकारी रिकॉर्ड से नदारद हों।