इंदौर. एक कमरे का स्कूल, एक ही शिक्षिका और पहली से पांचवीं तक की क्लास। छात्र एकतरफ मुंह करके बैठें तो एक क्लास और दूसरी तरफ पीठ फेर लें तो कोई और। पांचवीं के छात्र भी पहली-दूसरी का पाठ पढ़ने को मजबूर। यह बदहाली कटकटपुरा के सामुदायिक भवन में चल रहे स्कूल के साथ 72 स्कूलों की है। सभी स्कूल सामुदायिक भवनों में एक-दो शिक्षकों के भरोसे ही चल रहे हैं।
ऐसे स्कूलों की जानकारी शिक्षा विभाग के अधिकारियों को भी है लेकिन व्यवस्था सुधारने में कोई रुचि नहीं लेता। हालांकि इसके लिए हर साल करोड़ों रुपए खर्च किए जाते हैं। पिछले साल 28 करोड़ रुपए आए थे तो इस साल 29 करोड़।
सामुदायिक भवन, कटकटपुरा के एक कमरे में पहली से पांचवीं तक 128 बच्चों को सहायक शिक्षिका ज्योति महोदय पढ़ाती हैं। वे जब पहली कक्षा के छात्रों को पढ़ाती हैं तो दूसरी से पांचवीं के छात्र मजबूरी में सुनते हैं। ऐसी ही स्थिति प्राथमिक विद्यालय क्रमांक-134, 40 और 43 की भी है। वहां पांच-पांच कक्षाओं के लिए दो-दो शिक्षक हैं।
संकुल प्रभारी सुधारें व्यवस्था
जिला शिक्षा अधिकारी माया मालवीय इस मामले को अत्यंत सामान्य तरीके से लेती हैं। वे बताती हैं शिक्षकों की भर्ती की प्रक्रिया चल रही है। उन्हें बताया वहां वर्षो से यही बदहाली है तो जवाब मिला संबंधित संकुल प्रभारी को सुधारना चाहिए।
मजबूरी में पढ़ाते हैं यहां
इसी स्कूल में बच्चों को पढ़ाने वाले सुरेश गुप्त व आरती खत्री जानते हैं पढ़ाई कैसी हो रही है लेकिन निजी स्कूल में पढ़ाने के पैसे नहीं हैं। जिनकी आर्थिक स्थिति सुधरती है वे तत्काल बच्चों को किसी और स्कूल में भर्ती करा देते हैं।
एक कक्षा के लिए आधे से एक घंटा
12 से 5 बजे तक लगने वाले इन स्कूलों में एक कक्षा की पढ़ाई के लिए आधे से एक घंटा ही मिल पाता है। किसी एक क्लास की पढ़ाई होती है तो बाकी चार क्लास के बच्चे रास्ता देखते हैं। वहीं प्रकाश का बगीचा के सरकारी स्कूल में पांच क्लासेस के लिए पांच शिक्षिकाएं हैं।
कई बार छात्रों के हवाले रहता है स्कूल
कटकटपुरा के स्कूल में जिस दिन किसी कारण श्रीमती महोदय नहीं पहुंच पातीं, पूरा स्कूल छात्रों के हवाले रहता है। पिछले साल परीक्षा के दौरान उनकी ड्यूटी निर्वाचन कार्य में लग गई थी तब कक्षाएं खाली रहीं। परीक्षा के दो दिन पहले वे पढ़ाने पहुंचीं तो निर्वाचन कार्यालय से नोटिस मिल गया।