हिसार. लगातार दो दिन से हो रही बारिश ने बेशक मौसम को खुशनुमा बना दिया हो लेकिन इसने किसानों को भारी नुकसान पहुंचाया है। तीन सप्ताह पहले जो किसान बारिश के लिए आसमान पर टकटकी लगाए बैठा था वह अब बारिश के न होने की प्रार्थना कर रहा है।
ढाणी गारण निवासी सूरजभान नंबरदार ने बताया कि दो दिन से लगातार हो रही बारिश से उनके कपास की फसल नष्ट होने की कगार पर पहुंच गई है। अधिकतर पौधों से फूल झड़ गए हैं और खेतों में सिर्फ लकड़ियां ही बची हैं। तलवंडी राणा के चंदाराम गिरधर ने बताया कि पककर तैयार खड़ी धान की फसल को भी इस बारिश ने नुकसान पहुंचाया है। जमीन गिली होने के अलावा बारिश से धान के पौधे जमीन में गिर गए हैं।
जुगलान गांव निवासी विजय सिवाच ने बताया कि कपास के फूल गिरने के अलावा अब कपास के पौधों की फिर से बढ़वार की आशंका बन गई है जिसके कारण न सिर्फ लेट कटाई करनी पड़ेगी बल्कि फिर से होने वाली बारिश का खतरा भी मंडाराता रहेगा। दूसरी तरफ दिनभर बारिश के कारण गुरुवार को मौसम ठंडा हो गया और लोगों को अपने कूलर व पंखे बंद करने पड़ गए।
पारा गिरा 9 डिग्री, छह माह का रिकॉर्ड टूटा
सितंबर माह की रिकॉर्ड तोड़ 46.7 एमएम बारिश के बाद गुरुवार को अधिकतम पारा 9 डिग्री सेल्सियस गिरकर 28 डिग्री सेल्सियस पर आ गया, जबकि न्यूनतम तापमान 20.9 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।
इतना कम तापमान करीब छह माह पहले 23 मार्च को 29 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया था, जबकि गर्मियों में ऐसा मौसम पहली बार हुआ है। सितंबर माह के पहले पखवाड़े में इतनी ज्यादा बारिश सन 2004 में ही हुई थी, जबकि वर्ष 2005 और 2006 में 10 एमएम बारिश भी नहीं हुई थी।
पछेती कपास में ज्यादा दिक्कत : डॉ. मलिक
हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय के विस्तार शिक्षा निदेशक डॉ. आरके मलिक के अनुसार कपास को ज्यादा नुकसान तो नहीं हुआ है लेकिन यह बारिश फायदे की नहीं है। उन्होंने कहा कि इस बारिश से कपास में फिर से बढ़वार शुरू होने से फसल की खुराक पत्तियों में चली जाती है।
पछेती कपास में ज्यादा दिक्कत है। जिस फसल में बाल आ गया है उसे ज्यादा नुकसान नहीं है लेकिन जिसमें बाल की शुरुआत हुई है, उसमें नुकसान है। धान की फसल इन दिनों तेज बारिश के कारण गिर सकती है, जिससे मजदूरी के अत्यधिक खर्च के अलावा अन्य नुकसान भी हो सकता है।