अजमेर:
फास्ट ट्रेक कोर्ट प्रथम ने नाबालिग से सामूहिक दुराचार के तीन आरोपियों को दस-दस वर्ष के कठोर कारावास और उनकी मदद करने की आरोपी महिला को पांच वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई। अभियुक्तों पर एक-एक हजार रुपए का जुर्माना भी किया गया। जुर्माना नहीं चुकाने पर तीन-तीन माह का अतिरिक्त कारावास भोगना पड़ेगा।
फास्ट ट्रेक अदालत प्रथम के न्यायाधीश महावीर प्रसाद शर्मा ने अजरुनलाल सेठी नगर निवासी राजू पुत्र सुगनचंद कोली (21), दिनेश पुत्र बाबूलाल कोली (19), मुकेश पुत्र छोटूसिंह रावत (19) को भादसं की धारा 376 (2)(जी) के तहत एक नाबालिग लड़की से सामूहिक दुराचार का दोषी करार दिया और इंदिरा पत्नी सोहन सिंह रावत (25) को भादसं की धारा 366 के तहत लड़की को बहला कर दुराचारियों तक पहुंचाने का दोषी ठहराया।
राजू, दिनेश, मुकेश को 10-10 वर्ष के कठोर कारावास और एक-एक हजार रुपए के जुर्माने से दंडित किया है जबकि इंदिरा को पांच वर्ष के कठोर कारावास और एक हजार रुपए के जुर्माने की सजा सुनाई गई। गिरफ्तारी के बाद से ही तीनों आरोपी जेल में बंद थे, जबकि इंदिरा जमानत पर छूटी हुई थी।
मामला यह था
पीड़िता किशोरी अपनी बहिन और जीजा के साथ रहती थी। एक महिला इंदिरा पीड़िता को बहला फुसला कर खेत पर ले गई जहां उसके साथ दिनेश ने दुराचार किया। उसके बाद यह सिलसिला डेढ़ माह तक चलता रहा। डेढ़ माह बाद उसके पड़ोसी व पीड़िता के जीजा की पूर्व पत्नी के भाई राजू ने पीड़िता को ब्लैकमेल किया और दवा दिलाने के बहाने ऑटो में बिठाकर गंज क्षेत्र में ले गया जहां राजू के अलावा अन्य पड़ोसी मुकेश व फोरू व खूबचंद उर्फ खूबा ने भी उसके साथ दुराचार किया। उसके बाद भी यह सिलसिला चलता रहा और वे पीड़िता के घर में आते रहे। लेकिन, एक रात राजू व मुकेश ने गलती से पीड़िता की बजाय उसकी बहिन को जगा दिया। जाग होते ही दोनों भाग गए। बहिन ने पीड़िता की पिटाई की तो सच्चाई सामने आ गई।
हालांकि 10 अगस्त 2005 को आदर्शनगर थाने में पीड़िता ने जो शिकायत पेश की उसमें बताया कि राजू ने पीड़िता को सुंदर के मकान से गैंती पावड़ा लाने को कहा। वहां पहुंची तो आरोपियों ने उससे सामूहिक दुराचार किया। बाद में 17 अगस्त को मजिस्ट्रेट कैलाशचंद अठवासी के समक्ष सीआरपीसी की धारा 164 के तहत बयान दर्ज हुए तो उसमें उसने नए सिरे से सिलसिलेवार घटनाक्रम की जानकारी दी।
एक फरार, दूसरा नाबालिग
इस मामले में एक अभियुक्त फोरू पुत्र धूलसिंह रावत मामला प्रकाश में आने के बाद से ही फरार है जबकि छठे आरोपी अदालत पूर्व में ही नाबालिग ठहराते हुए मामला बाल न्यायालय को सौंप चुकी है।
फूट पड़ी रुलाई
नाबालिग लड़की को दुराचार के दलदल में फंसाने की आरोपी इंदिरा को जैसे ही न्यायाधीश ने सजा सुनाई, वह फूट-फूट कर रो पड़ी। उसकी मां व परिवार के अन्य लोग भी फैसला सुनाए जाने के वक्त मौजूद थे। लेकिन तीन आरोपियों के परिवार का कोई सदस्य मौजूद नहीं था।
17 गवाह पेश
विशेष लोक अभियोजक अशोक तेजवानी के मुताबिक अभियोजन ने इस मामले में 17 गवाह पेश किए। बचाव पक्ष की ओर से कोई गवाह पेश नहीं किया गया। कार्रवाई के दौरान पीड़िता दो बार गवाही देने आई। इस दौरान उसकी शादी हो चुकी थी।
धमकाना नहीं छोड़ा
आरोपियों ने पीड़िता और उसके परिवार वालों को डराने-धमकाने का प्रयास किया। पीड़िता और उसके परिवार वालों ने महिला आयोग, मुख्यमंत्री, मानवाधिकार आयोग आदि की शरण ली। पुलिस से भी सुरक्षा की मांग की।