इंदौर.
इंदौर से सेंधवा तक 161 किलोमीटर का सफर तीन घंटे में.. आज की स्थिति में इससे बेहतर कोई मजाक नहीं हो सकता लेकिन तीन साल में यह हकीकत में बदल जाएगा। तब इंदौर से सेंधवा तक फोरलेन सड़क होगी। राऊ-खलघाट का काम चल रहा है और खलघाट-सेंधवा का साढ़े पांच सौ करोड़ का ठेका नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एनएचएआई) ने हैदराबाद की एक कंपनी को बुधवार शाम दिया।
काम फरवरी 2008 में शुरू होगा। एनएचएआई ने राष्ट्रीय राजमार्ग विकास परियोजना के तहत खलघाट-सेंधवा (८४ किलोमीटर)मार्ग फोरलेन करने के टेंडर मई में बुलाए थे। रिलायंस, नवयुग सोमा कंस्ट्रक्शन, हैदराबाद सहित पांच कंपनियों ने टेंडर डाले।
बुधवार को दिल्ली में वित्तीय प्रस्ताव खोले और हैदराबाद की फर्म को काम सौंप दिया। बिल्ट ऑपरेट एंड ट्रांसफर (बीओटी) सिस्टम में होने वाले निर्माण के लिए कंपनी ने ५४९ करोड़ रुपए का प्रस्ताव रखा था। इसके एवज में वह साढ़े सत्रह साल तक टोल टैक्स वसूलेगी।
एनएचएआई के क्षेत्रीय प्रभारी अधिकारी आशीष असाटी ने बताया कागजी खानापूर्ति के बाद फरवरी २00८ से काम शुरू हो जाएगा। सड़क के साथ निमरानी, जुलवानिया, ठिकरी, बालसमुद, बरूफाटक और सेंधवा में बायपास बनेंगें और घाट चौड़े किए जाएंगे। कंपनी को ३0 महीने में काम पूरा करना होगा।
राऊ-खलघाट पर काम जारी
राऊ-खलघाट (७७ किलोमीटर) फोरलेन का काम दो साल से चल रहा है जिसकी लागत ४५क् करोड़ है। उसमें महू, गुजरी व धामनोद में बायपास और भेरूघाट सहित अन्य घाटों को चौड़ा करना शामिल है। भेरूघाट में ढाई किलोमीटर लंबा ब्रिज भी बनेगा। देवास से राऊ बन चुकाजवाहरनगर (देवास) से राऊ (इंदौर) के बीच ५२ किलोमीटर फोरलेन २६५ करोड़ की लागत से दिसंबर २क्क्क् में बना था।
क्या है राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजना
राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजना १९९५ में शुरू हुई थी। इसमें दो चरणों में ५४,000 करोड़ रुपए में १४ हजार किलोमीटर सड़कों की दशा सुधारने का लक्ष्य था। २00५ से शुरू हुए तीसरे चरण में १0 हजार किलोमीटर राष्ट्रीय राजमार्गो के उच्च दबाव वाले चुनिंदा कॉरिडोर का उन्नयन करने के लिए ५५ हजार करोड़ रुपए का बजट है। इसमें से २४ हजार किलोमीटर की जवाबदारी एनएचएआई की है।
प्रदेश में और कहां-कहां
ग्वालियर बायपास- अप्रैल २00७ में शुरू हुआ काम अक्टूबर २00९ में पूरा होगा। ठेका रामके-ऐरा-श्रीराम कंस्ट्रक्शन को मिला।
ग्वालियर-झांसी- जनवरी २00७ में शुरू हुआ काम दिसंबर २00९ में पूरा होगा। काम मिला डीएससी अपोलो कंसोर्टियम और ग्रांटमिज कार्लब्रो को।
गुना बायपास- जनवरी २00७ में काम शुरू। जनवरी से जुलाई २00७ तक गुना इंफ्रास्ट्रक्चर फिर आर्वी एसोसिएट को जवाबदारी सौंपी।
नर्मदा पर एक और पुल
इसी योजना में खलघाट में नर्मदा पर मौजूदा टू लेन पुल से 300 मीटर दूरी पर थ्री लेन पुल और बनेगा।
जमीन अधिग्रहण जोरों पर
फोरलेन के लिए जमीन जुटाने की कवायद तीन-चार महीने पहले शुरू हो चुकी है। बड़े हिस्से का अधिग्रहण किया जा चुका है। बाकी की प्रक्रिया जोरों पर है।
इंदौर-मुंबई फोर लेन
श्री असाटी ने बताया एनएचएआई का लक्ष्य 2011 तक इंदौर-मुंबई (595 किलोमीटर) फोरलेन करना है। तीन साल में मध्यप्रदेश का हिस्सा पूरा बन जाएगा और महाराष्ट्र को चार साल लगेंगे।