नई दिल्ली. छवि को हो रहे नुकसान की भरपाई करने की कसरत के तहत केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में पेश किए अपने दो हलफनामे शुक्रवार को वापस ले लिए हैं। इनमें वह विवादित हलफनामा भी शामिल है जो भारतीय पुरातत्व सर्वे ने पेश किया था।
गौरतलब है कि एएसआई द्वारा गुरुवार को पेश किए गए हलफनामे के बाद सरकार पर आलोचना का कहर बरस पड़ा था। इस हलफनामे में कहा गया था कि भगवान राम और रामायण में वर्णित उनके द्वारा बनवाए गए रामसेतु का कोई ऐतिहासिक या वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।
सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश केजी बालकृष्णन की अध्यक्षता वाली बेंच ने केंद्र को हलफनामे वापस लेने की इजाजत देते हुए कहा कि रामसेतु क्षेत्र में हो रहे निर्माण पर रोक संबंधी 31 अगस्त का अंतरिम आदेश बरकरार है। सरकार ने कहा कि वह सेतुसमुद्रम परियोजना से संबंधित इस मामले का पूरा परीक्षण और अध्ययन करेगी और इसके लिए उसने कोर्ट से तीन महीने का समय मांगा। इस पर कोर्ट ने इस मामले की सुनवाई जनवरी 2008 के पहले हफ्ते तक टाल दी।
जया ने दिखाए तेवर :
इससे पहले सरकार द्वारा रामसेतु पर सुप्रीम कोर्ट में पेश किए गए इन दोनों हलफनामों के बारे में एआईएडीएमके सुप्रीमो जयललिता ने सरकार को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि यूपीए सरकार ने इस तरह के एफिडेविट पेशकर अपनी समाजवादी विचारधारा के विपरीत कार्य किया है।