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Chhattisgarh
Raipur Raipur रायपुर. वरिष्ठ शिक्षकों के भारी विरोध और सूची तैयार करने में अनियमितता की शिकायतों के बाद शिक्षा विभाग के आला अफसरों ने 15 से 17 सितंबर को शिक्षा महाविद्यालय में आयोजित काउंसिलिंग निरस्त कर दी। काउंसिलिंग कैंसिल करने का निर्णय शुक्रवार को देर शाम लिया गया। शासकीय शिक्षा महाविद्यालय के नोटिस बोर्ड में इसकी घोषणा चस्पा कर दी गई।
जिला शिक्षा अधिकारियों के माध्यम से भी जिला मुख्यालयों में काउंसिलिंग कैंसिल करने की जानकारी भेज दी गई। शिक्षा सचिव नंद कुमार ने बताया कि काउंसिलिंग अक्टूबर के पहले सप्ताह आयोजित की जाएगी। उसकी तारीख बाद में घोषित की जाएगी। 25 सितंबर तक शिक्षा संचालनालय के अधिकारियों को शिक्षकों की क्रमवार वरिष्ठता सूची तैयार करने के निर्देश दे दिए गए हैं।
दूसरी ओर जानकारों ने बताया कि शिक्षा विभाग के अफसरों ने भले ही काउंसिलिंग अक्टूबर में करने का ऐलान किया है, लेकिन निकट भविष्य में पदांकन प्रक्रिया दोबारा होने के आसार नहीं है। सूत्रों ने दावा किया है कि शिक्षा संचालनालय में सैकड़ों शिक्षकों का गोपनीय प्रतिवेदन नहीं है। खाली पदों का सही-सही आंकड़ा भी तैयार नहीं किया गया है।
ऐसी दशा में शिक्षकों की र्निविवाद वरिष्ठता सूची बनाना नामुमकिन माना जा रहा है। जानकारों ने बताया कि आधी अधूरी जानकारी के कारण ही शिक्षकों की वरिष्ठता सूची सही नहीं बन सकी थी। हालांकि अफसरों ने गलती सुधारने की कोशिश की थी। पखवाड़े भर पहले काउंसिलिंग के लिए एक सूची जारी की गई। दैनिक भास्कर ने उसमें मृत और सेवानिवृत्त शिक्षकों के नाम छापकर हकीकत उजागर की।
उसके बाद अफसरों ने उस सूची को कैंसिल किया और दूसरी वरिष्ठता सूची बनवाई। उसी आधार पर शनिवार से काउंसिलिंग होनी थी। परीक्षण के बाद दूसरी सूची भी त्रुटिपूर्ण निकली। शिक्षक संघ ने काउंसिलिंग के खिलाफ आंदोलन तक करने की घोषणा कर दी थी।
उसके बाद ही अफसरों ने आनन-फानन में निर्णय लिया। गौरतलब है कि शिक्षा विभाग राज्यभर की 400 स्कूलों में प्राचार्य के खाली पदों को पदांकन के जरिये भरने के लिए काउंसिलिंग कराने की प्रकिया शुरु की थी।
पीएससी के पदों का क्या?
शिक्षा विभाग ने दो साल पहले 46 प्राचार्र्यो के पद पीएससी के भरने की तैयारी की थी। इसके लिए परीक्षा भी आयोजित कर ली गई है। बाद में मामला न्यायालय में उलझ गया। वह केस अभी विचाराधीन है। शिक्षा विभाग ने काउंसिलिंग प्रक्रिया के दौरान उन पदों को उजागर नहीं किया था।
नियमानुसार उन पदों को अलग करने के बाद ही काउंसिलिंग करनी थी। जानकारों का दावा है कि शिक्षा संचालनालय में अभी यह रिकार्ड भी उपलब्ध नहीं है कि पीएससी ने किन-किन जिलों के प्राचार्य पद के लिए परीक्षा आयोजित की थी।