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अजमेर. परिभ्रमण प्रस्ताव पर संदेह व्यक्त करने वाले ट्रस्टियों ने आखिरकार शुक्रवार को सचिव के सामने हथियार डालते हुए हस्ताक्षर कर दिए। वहीं सचिव नगर
परिषद को 3 करोड़ 49 लाख रुपए दिलवाने में कामयाब नहीं हो पाए।
ट्रस्टियों ने परिभ्रमण प्रस्ताव में शामिल परिषद की सड़कों पर सवा दो करोड़ के काम गिनाकर सचिव को चुप कर दिया। गौरव पथ को लेकर सचिव और ट्रस्टी में नोक झोंक हो गई। बैठक का एजेंडा शनिवार को जारी होने और 21 सितंबर को बैठक होने की संभावना है। बैठक के एजेंडा पर विचार करने के लिए शुक्रवार को अध्यक्ष ने ट्रस्टियों और अफसरों की बैठक बुलाई थी।
सूत्रों के अनुसार बैठक में सचिव ने मुख्यमंत्री की घोषणा का हवाला देते हुए कहा कि करीब 30 करोड़ रुपए की सड़कों का डामरीकरण कराना है। इसमें देरी होगी तो निर्धारित अवधि में डामरीकरण नहीं हो पाएगा। इस पर सदर सहित अन्य ट्रस्टियों ने प्रस्ताव पर चुपचाप हस्ताक्षर कर दिए। अलबत्ता अफसरों के लिए गाड़ियों के प्रस्ताव पर सचिव को दो की बजाय एक ही गाड़ी पर राजी होना पड़ा। परिभ्रमण प्रस्ताव पारित होने से उत्साहित सचिव ने नगर परिषद को 3 करोड़ 49 लाख रुपए देने पर जोर दिया लेकिन ट्रस्टी उखड़ गए।
ट्रस्टियों ने सचिव से कहा कि वे दोनों संस्थाओं के अधिकारी हैं, सिर्फ परिषद की पैरवी नहीं करें। ट्रस्टियों ने साफ कह दिया कि परिभ्रमण प्रस्ताव में परिषद को सड़कों के डामरीकरण पर सवा दो करोड़ रुपए दे चुके हैं, बाकी राशि नहीं देंगे।
गौरव पथ के निर्माण में हो रही देरी को लेकर ट्रस्टी अरविंद शर्मा और सचिव की बीच नोक-झोंक हो गई। बाद में तकनीकी और वित्तीय स्वीकृति का प्रस्ताव परिभ्रमण में शामिल करने के बाद मामला शांत हुआ। सैटबैक में शपथ पत्र लेने, अक्षय धुरी संस्था को जमीन देने, विभिन्न स्थानों पर प्रतिमाएं लगाने सहित अन्य प्रस्तावों को बैठक में स्वीकृत करने पर सहमति बन गई। आनासागर सरक्युलर रोड पर किए गए नियमन को निरस्त करने के प्रस्ताव कानूनी सलाह के बाद बैठक में रखने का फैसला हुआ।
अस्पताल के सौंदर्यन पर ढाई करोड़
जवाहरलाल नेहरू अस्पताल का सौंदर्यन और कॉर्डियोलॉजी व बर्न यूनिट के लिए ढाई करोड़ देने का प्रस्ताव बैठक में पारित करने का फैसला किया गया।
मंजूरी के लिए कहना पड़ा
न्यास सचिव अम्बरीश कुमार ने ट्रस्ट की वित्तीय और प्रशासनिक स्वीकृति के बिना परिषद को 3 केड़ 49 लाख रुपए के चेक पर हस्ताक्षर कर दिए थे। हालांकि अध्यक्ष के हस्ताक्षर नहीं करने की वजह से मामला अटक गया था। सचिव ने सहायक लेखाधिकारी को फाइल पर आपत्ति व्यक्त करने पर धमकाते हुए पूछा था कि किन नियमों में ट्रस्ट की स्वीकृति की बात कही गई है। आखिर में सचिव को मजबूरी में ट्रस्टियों से परिषद को राशि देने का आग्रह करना पड़ा।
परिषद से पंगा..
परिभ्रमण प्रस्ताव में सड़कों के डामरीकरण के लिए परिषद को सवा दो करोड़ रुपए 15 प्रतिशत हिस्सा राशि में से देने का फैसला किया गया है। मुख्यमंत्री ने सड़कों के डामरीकरण पर पांच करोड़ रुपए खर्च करने की घोषणा की थी। बाद में सदर ने राशि बढ़ाकर सात करोड़ रुपए कर दी। इसमें परिषद क्षेत्र की वे सड़कें भी शामिल थीं, जो पन्द्रह प्रतिशत राशि में से कराई जानी हैं। ऐसे में परिषद अपने हिस्से की राशि का सड़कों के डामरीकरण में उपयोग करने पर विरोध व्यक्त कर सकता है।
* ट्रस्ट के अधिकांश प्रस्तावों पर चर्चा हो गई है। सड़कों के डामरीकरण में देरी नहीं हो। इस वजह से परिभ्रमण प्रस्ताव पारित कर दिया गया।
-धर्मेश जैन, अध्यक्ष
* बैठक के एजेंडा के बिन्दुओं पर विचार विमर्श किया। एजेंडा जारी होने के एक सप्ताह बाद ट्रस्ट की बैठक होगी।
-अम्बरीश कुमार, सचिव