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ग्वालियर में पहली बार हाईकोर्ट की लार्जर बेंच

ग्वालियर. मध्यप्रदेश के एक कानून के लॉ पाइंट पर मप्र उच्च न्यायालय की पांच सदस्यीय लार्जर बेंच ने आज यहां दिन भर विशेष सिटिंग कर सुनवाई की। मप्र के 1956 में गठन के बाद गत पचास वर्षो में लार्जर बेंच की यहां यह पहली सिटिंग थी।

मध्यप्रदेश रिट अपील (खंडपीठ को) अधिनियम 2005 के अनुच्छेद 226 में यह व्यापक अधिकार हैं कि हाईकोर्ट की सिंगल जज बेंच अधीनस्थ न्यायालय/ट्रिब्यूनल/रेवेन्यू बोर्ड के फैसले को रिव्यु/रद/कायम रख सकता है।

इस अनुच्छेद के तहत दिये सिंगल बेंच के फैसले को हाईकोर्ट की डबल बेंच (डीबी) में अपील कर चुनौती दी जा सकती है। इसी कानून के अनुच्छेद 227 में सिंगल जज बेंच द्वारा दिये फैसले को डबल बेंच में अपील कर चुनौती देने पर प्रतिबंध का प्रावधान है।

लेकिन, सुप्रीम कोर्ट ने रामा एण्ड कंपनी मामले में दिये निर्देश में कहा है कि अनुच्छेद 227 के तहत सिंगल जज का दिया फैसला डीबी में मेन्टेनेबल है और डीबी फैसले का परीक्षण कर सकती है। एपेक्स कोर्ट की इस राय के पहले मप्र हाईकोर्ट की तीन सदस्यीय फुल बेंच अनुच्छेद 227 के तहत सिंगल जज बेंच के दिये फैसले पर डीबी में अपील नहीं कर सकने की राय दे चुकी है।

सुप्रीम कोर्ट की राय यह भी थी कि फैसला अनुच्छेद 226 में हो या 227 में डीबी में अपील की जा सकती है और सुनवाई भी। मुख्य न्यायाधीश एके पटनायक, जस्टिस एके गोहिल, जस्टिस दीपक मिश्रा, जस्टिस सुभाष संवत्सर और जस्टिस एसके गंगेले की लार्जर पीठ ने सुनवाई की। इस कानूनी नुक्ते पर एक दर्जन से अधिक सीनियर वकीलों ने पक्ष और विपक्ष में अपने तर्क प्रस्तुत किये।

2005 के उपरोक्त रिट अपील अधिनियम के पहले यह लेटर पेटेंट अपील के नाम से था और इसके अनुच्छेद 226 और 227 दोनों में सिंगल जज बेंच के फैसले के विरुद्ध डबल बेंच (डीबी) में अपील का प्रावधान था।

राज्य के अतिरिक्त महाधिवक्ता श्याम बिहारी मिश्र तथा उनके साथी सरकारी वकीलों का तर्क था कि रामा एण्ड कंपनी के मामले में सुप्रीम कोर्ट का फैसला संबंधित पार्टियों पर ही बंधनकारक है किसी अन्य पर नहीं जबकि अधिकतर वकीलों का तर्क था कि अनुच्छेद 227 के तहत दिया सिंगल जज बेंच का फैसला अपील के द्वारा डबल बेंच में मेन्टेनेबल है।

लंच के बाद दूसरी सिटिंग में कोर्ट ने स्टेट ऑफ एमपी बनाम मैसर्स शेखर कंस्ट्रक्शन के मामले में बहस सुनी। इस सिटिंग में जस्टिस एसके गंगेले की जगह जस्टिस राजेन्द्र मेनन ने ली।





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