Breaking News 
bhaskar Web English


HomeNewsRajasthanJodhpur Jodhpur

विधायक को बचाने में फंसी पुलिस

जोधपुर. राज्य की मुख्यमंत्री व भाजपा के शीर्ष नेताओं को एक पोस्टर में देवी-देवता के रूप में महिमा मंडित कर धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने के मामले में शहर विधायक व एक पंडित को बचाने के फेर में शहर की पुलिस खुद ही कानूनी शिकंजे में फंसती जा रही है।

भाजपा के वरिष्ठ नेता जसवंतसिंह की पत्नी श्रीमती शीतल कंवर की ओर से पेश परिवाद पर जोधपुर की एक अदालत ने शहर विधायक श्रीमती सूर्यकांता व्यास व पंडित हेमंत बोहरा के खिलाफ पुलिस को एफआईआर दर्ज कर अनुसंधान का आदेश दिया था। इसके बावजूद रिपोर्ट दर्ज नहीं कर मामले की फौरी जांच कर रिपोर्ट पेश करने को गंभीरता से लेते हुए कोर्ट ने उदयमंदिर के थानाधिकारी को अवमानना नोटिस जारी कर 10 दिन में जवाब-तलब किया है। न्यायिक मजिस्ट्रेट बुलाकीदास व्यास ने पूर्व आदेश के मुताबिक आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर जांच करने का आदेश दिया है।

मंत्रिमंडल का भी महिमा मंडन
एक समारोह में विमोचित पोस्टर में पंडित हेमंत बोहरा ने स्वयं को मां देवी अन्नपूर्णा का सेवक बताया। इसी पोस्टर में वसुंधरा राजे को देवी अन्नपूर्णा, लालकृष्ण आडवाणी को ब्रrा, राजनाथ सिंह को विष्णु, अटलबिहारी वाजपेयी को महेश, के रूप में दर्शाया। इतना ही नहीं राज्य के मंत्री लक्ष्मीनारायण दवे को कुबेर व प्रतापसिंह सिंघवी को इंद्र बताया गया था। श्रीमती शीतल कंवर का आरोप था कि एक षड़यंत्र के तहत इस पोस्टर का विमोचन किया गया। इससे उनकी धार्मिक भावनाएं आहत हरुई हैं।

वसुंधरा में मां भगवती के दर्शन
जांच के दौरान पंडित बोहरा ने पुलिस को बयान दिया कि परिवर्तन यात्रा के दौरान मैंने पहली बार मां वसुंधरा के दर्शन किए तो मुझे उनमें साक्षात मां भगवती स्वरूपा के दर्शन हुए। मिड डे मील योजना से प्रभावित होकर उन्हें मां अन्नपूर्णा का भावनात्मक झांकी में नाम दिया। यह पूर्णतया निजी भावनात्मक कृति है।

सब गोलमाल है
न्यायिक मजिस्ट्रेट व्यास ने श्रीमती शीतल कंवर की अवमानना याचिका को स्वीकार करते हुए कहा कि परिवादी की ओर से पुलिस अधीक्षक के समक्ष पेश रिपोर्ट पर जांच किस आधार पर व किसके आदेश पर की गई। इस संबंध में कोई स्पष्टीकरण पुलिस की ओर से नहीं दिया गया है। न्यायालय द्वारा भेजे गए परिवाद पर पुलिस ने क्या अनुसंधान किया और क्या नतीजा रहा? इस संबंध में अभी तक खुलासा नहीं किया है, जबकि अदालत द्वारा भेजे गए परिवाद अंतर्गत धारा 156(3) दंड प्रकिया संहिता पर पुलिस को अविलंब प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज कर अनुसंधान करना था।

क्या कहती है पुलिस जांच
बोहरा भाजपा का कार्यकर्ता है। जिसने मुख्यमंत्री एवं मंत्रिमंडल के समक्ष अपनी अच्छी छवि बनाने के उद्देश्य से भावनात्मक चित्र तैयार किया। जिसका उद्देश्य किसी की धार्मिक भावना को ठेस पहुंचाने का नहीं था। श्रीमती सूर्यकांता व्यास ने स्वतंत्रता सेनानी वीरवर जुगराज बोहरा की स्मृति में प्रतिभा सम्मान समारोह में बिना किसी पूर्व मंत्रणा के इस चित्र का लोकार्पण किया।

* इस प्रकरण की जांच एएसपी कर रहे थे, इसलिए मुकदमा दर्ज नहीं किया गया और जांच पूरी होने पर रिपोर्ट कोर्ट में पेश कर दी गई। कोर्ट से थानाधिकारी के खिलाफ नोटिस जारी होने की जानकारी मुझे नहीं मिली है।
—हवासिंह घुमरिया एसपी, सिटी जोधपुर





अपने विचार यहां लिखें
नाम:
ईमेल आईडी:
भाषा चुनॆ
हिन्दी रॊमन‌ हिन्दी फॊनॆटिक English
विचार:
कोड: