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Chhattisgarh
Raipur Raipur राजनांदगांव. नई पेयजल आवर्धन योजना के तहत शहर में करोड़ों रुपए खर्च कर बिछाई गई 23 किलोमीटर लंबी पाइप लाइन डेढ़ साल बाद भी सूखी है। दरअसल पाइप लाइन को हैंडओवर करने को लेकर सालभर पहले ही निगम व पीएचई में विवाद छिड़ गया था।
यह आज तक बरकरार है। इस कारण नई लाइन की टेस्टिंग भी पूरी नहीं हो पायी। बताया गया कि पाइप बिछाने के बाद पीएचई ने कुछ जगहों पर टेस्टिंग तो कराई लेकिन उस दौरान मिले फाल्टों को दुरुस्त नहीं किया गया। इस कारण निगम ने हैंडओवर लेने से इंकार कर दिया।
बाद में तय हुआ कि दोनों विभाग के अधिकारियों की मौजूदगी में टेस्टिंग की जाएगी और कमियों को मौके पर ही पूरी कर दी जाएगी लेकिन ऐसा नहीं हो पाया।
वर्तमान में स्थिति ऐसी है कि चालू होने के पहले ही नई पाइप लाइन कई जगह सड़ने लगी है। इस कारण भी निगम उसे हैंडओवर लेने में कतरा रहा है। निगम के अधिकारियों का कहना है कि चुंकि पाइप लाइन का पूरा काम पीएछई ने ही कराया है, इसलिए वह कंप्लीट कर ही हैंडओवर करे लेकिन पीएचई के अफसरों का कहना है कि लाइन कंप्लीट है और निगम को हैंडओवर भी किया जा चुका है।
अपनी अक्षमता को छिपाने निगम नौटंकी कर रहा है। विवादों का निपटारा करने कलेक्टर संजय गर्ग ने पहल की है। निगम अध्यक्ष मधुसूदन यादव ने बताया कि मंगलवार को दोनों विभागों की बैठक कराई जाएगी।
इसमें बीच का रास्ता निकालकर काम आगे बढ़ाने पर सहमति बनाई जाएगी। उनका कहना है कि निगम पानी सप्लाई करने के लिए पूरी तैयारी कर चुका है। बशर्ते निगम को फाइनल टेस्टिंग के बाद लाइन हैंडओवर कर दिया जाए।
उधर विवादों के चलते शहर के एक तिहाई लोगों को पेयजल आवर्धन योजना का लाभ नहीं मिल पा रहा है। गर्मी तो दूर भरी बारिश में भी उन्हें जल संकट का सामना करना पड़ रहा है। शहर में ऐसे कई वार्ड हैं जहां पेयजल के लिए टैंकर ही एकमात्र उपाय है। जबकि वहां पाइप लाइन बिछाई जा चुकी है।
एकमात्र विकल्प नया एनीकट
नई पाइप लाइन में पानी सप्लाई पहुंचाने के लिए निगम के पास एकमात्र विकल्प शिवनाथ नदी पर मोहारा में प्रस्तावित एनीकट ही है। लेकिन अब तक काम शुरु नहीं हुआ है। इस कारण उसका लाभ लोगों को कब मिलेगा, कहा नहीं जा सकता।
नीकट में पर्याप्त पानी संग्रहित तो कर लिया जाएगा लेकिन संयंत्र की क्षमता कम होने के कारण उसके वितरण का संकट तब भी रहेगा। इस कारण मोहारा में जल संयंत्रों की क्षमता भी बढ़ानी होगी।
उसके बाद ही अतिरक्ति पानी सप्लाई किया जा सकेगा। श्री यादव ने बताया कि जरुरत के हिसाब से मोहारा में नया फिल्टर प्लांट व नई टंकियों का निर्माण कराया जाना भी प्रस्तावित है।
कहां से आएगा पानी
करोड़ों रुपए खर्च कर शहर में पाइप लाइन तो बिछा दी गई, लेकिन वहां के लिए पानी कहां से आएगा, यह अब भी पहेली बनी हुई है। दरअसल मोहारा एनीकट में पानी तो पर्याप्त है लेकिन उसे नई लाइन तक पहुंचाने का फामरूला नगर निगम या पीएचई अब तक नहीं ढूंढ पाया है। तकनीकी अफसरों के मुताबिक मोहारा एनीकट की संग्रहण क्षमता 25 एमसीएफटी है। पानी संग्रहित रखने की है।
वहां से कुल .75 एमसीएफटी पानी रोजाना खप जाता है। नई लाइन चालू करने से खपत कम से कम .25 एमसीएफटी बढ़ने की संभावना है। इस अतिक्ति खपत के लिए निगम यदाकदा पानी तो जुगाड़ लेगा लेकिन उसे पाइप लाइन तक कैसे पहुंचाया जाएगा, यह अब तक कठिन समस्या बना हुआ है।