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धूमधाम से विराजे विघ्नहर्ता

धमतरी.gannu गणॆश‌ चतुर्थी पर शनिवार को सुबह 7.30 बजे से भगवान विध्नहर्ता की प्रतिमा स्थापित करने का सिलसिला शुरू हो गया, जो देर रात तक चलता रहा। सार्वजनिक उत्सव समितियों के लोग बाजे गाजे के साथ डीजे की धुन पर नाचते गाते भगवान श्रीगणॆश‌ को पंडाल स्थल तक ले जाते रहे, पर उनके पंडालों में पूर्व वर्षो की भांति इस बार रौनक कम नजर आ रही है, क्योंकि कहीं भी झांकी सजाने की तैयारी नहीं की गई है, इसका कारण प्रतिस्पर्धा का आयोजन नहीं होने को माना जा रहा है।

शहर का गणोशोत्सव कुछ साल पहले तक अपनी भव्य और आकर्षक झांकियों के लिए विख्यात रहा है, जिन्हें देखने दूरदराज से लोग आते थे। तुरंत चुकारा समिति जब तक गणोशोत्सव का स्थल सजावट और विसर्जन झांकी प्रतियोगिता का आयोजन रखती रही, तब तक सार्वजनिक उत्सव की भव्यता भी बरकरार रही।

समिति ने जब से प्रतियोगिता का आयोजन बंद किया, तब से झांकियों के प्रति उत्सव समितियों का मोह भी भंग होने लगा। इस वर्ष स्थिति यह है कि किसी भी संस्था ने झांकी प्रतियोगिता की घोषणा नहीं की है, फलस्वरूप किसी भी सार्वजनिक गणोशोत्सव समिति ने झांकी सजाने की तैयारी नहीं की है। भीखू सेठ के यहां निजी तौर पर हर साल की तरह इस साल भी आकर्षक झांकी सजाई गई है।

दर्जनों समितियों ने की स्थापना
शहर में दर्जनों स्थानों पर सार्वजनिक गणोशोत्सव समितियों ने प्रतिमाएं स्थापित की है, जिनमें नवजागरण गणोशोत्सव समिति गोला बीड़ी, बालकला मंदिर आमापारा, सत्यम गणोशोत्सव समिति बनिया तालाब आमापारा, संत बाबा जागरण गणोशोत्सव समिति गोल बाजार आमापारा, जय बाल गणोशोत्सव कचहरी चौक, सदर बाजार गणोशोत्सव कहचरी चौक, सिंधी नवयुवक गणोशोत्सव समिति बम्लई मंदिर, गणोश मंदिर समिति गणोश चौक, जबर्दस्त गणोशोत्सव समिति गणोश चौक, आदर्श नवयुवक गणोशोत्सव समिति नहर नाका चौक, श्री गणोशाय समिति एफसीआई चौक सिहावा रोड, आधुनिक गणोशोत्सव समिति मकई चौक, बाल कलामंच साल्हेवार पारा, नवजागृति गणोशोत्सव समिति रिसाईपारा, वंदेमातरम गणोशोत्सव समिति टिकरापारा, सार्वजनिक गणोशोत्सव समिति जोधापुर, नवयुवक गणोशोत्सव समिति ब्रम्हचौक, विनायक गणोशोत्सव समिति गोकुलपुर, सर्वोत्तम नवयुवक समिति जेल रोड बठेना, बाल समाज गणोशोत्सव समिति मठमंदिर चौक, गौरी गौरा गणोशोत्सव समिति बनियापारा, गणोशोत्सव समिति दुर्गा चौक बनियापारा, न्यू बाल समाज गणोशोत्सव समिति धोबी चौक, न्यू खेल खिलाड़ी बजरंग चौक, गोविंद सिंह बाल गणोशोत्सव समिति स्टेशन रोड, युवा समिति नयापारा, न्यू बाल गणोशोत्सव समिति आजाद चौक, आदर्श नवयुवक गणोशोत्सव समिति दानीटोला, स्वतंत्र युवा मंच समिति बिलाईमाता रोड समेत कई अन्य समितियां शामिल है।

कम पड़ गई मूर्तियां
शहर के कुम्हारपारा, डागा धर्मशाला, आमापारा, बनियापारा, प्रभाकर पेंटर समेत अनेक जगहों में महीनेभर से आर्डर पर भगवान गणॆश‌ की प्रतिमाएं तैयार हो रही थी, साथ ही बगैर आर्डर के भी बड़ी संख्या में मूर्तियां बनी थी। छोटी प्रतिमाओं की कमी पड़ गई, जिसके चलते गांव से आए कई खरीददारों को मायूस होना पड़ा। शहर में इस बार भी भगवान श्रीगणोश की प्रतिमा विविध रूपों में बनी।

जगह-जगह विराजे गणपति
महासमुंद.

गणॆश‌ चतुर्थी पर्व पर चहुंओर उत्साह का माहौल। जगह-जगह और घर-घर विराजे विघ्नहर्ता लंबोदर महाराज। ग्यारह दिन रहेगी गणोशोत्सव की धूम। गणॆश‌ जन्मोत्सव का ग्यारह दिवसीय पर्व का शनिवार को शुभारंभ हुआ।

विघ्नहर्ता भगवान गणॆश‌ की छोटी और बड़ी प्रतिमाओं को विराजने ले जाने का क्रम दिनभर चलता रहा। विभिन्न साधनों से लोग भगवान श्रीगणोश की प्रतिमा को लेकर समारोह स्थल और घरों तक पहुंचे जहां श्रद्धा और भक्तिभाव से पूजा-अर्चना कर मूर्तियां विराजी गई। इसी के साथ गणोशोत्सव का शुभारंभ हो गया।

क्यों होता है गणोशोत्सव का आयोजन
ग्यारह दिवसीय गणोशोत्सव पर्व के संबंध में बुजुर्गाें और पंडितों का कहना है कि वस्तुत: भाद्र शुक्ल चतुर्थी के दिन दोपहर में श्रीगणोश का जन्म होना माना जाता है। इस लिहाज से गणोशजी की मूर्ति स्थापित कर पूजा अर्चना की जाती है। स्वाधीनता आंदोलन के समय गणोशोत्सव की आड़ में रणनीति बनाने इसे ग्यारह दिन तक विसर्जित ही नहीं किया गया। तब से ग्यारह दिवसीय गणोशोत्सव की परंपरा बन गई।

चंद्रदर्शन है वर्जित
गणॆश‌ चतुर्थी की रात चंद्र दर्शन वर्जित है। पं. पंकज तिवारी ने बताया कि इस दिन चंद्रमा को देखने से मिथ्या आरोप लगता है। पौराणिक मान्यताआंे के अनुसार गणॆश‌ चतुर्थी का चंद्रदर्शन वर्जित है। चंद्रमा का दर्शन करने से बचना चाहिए।





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