दिल से
भारत में एक महान देश होने के लक्षण नहीं पाकर मेरे अंदर हिलोरें लेने वाली देशभक्ति की भावनाएं बदलने लगी थीं। लगा दुनिया के बड़े देशों के सामने वह कभी नहीं टिक सकेगा। एक दशक पहले ग्रीन कार्ड मिला, जो अमेरिका में आरामदायक जीवन जीने का टिकट था। लेकिन राष्ट्रप्रेम के चलते लगा कि मैं भारत में काम करूं और ताउम्र यहीं रहूं, क्योंकि मेरा वतन भारत है, अमेरिका नहीं। शुभचिंतक सोचते हैं कि यह मेरी बड़ी भूल थी। लेकिन मुझे इसका रत्ती भर मलाल नहीं है। हां, हाल के कुछ वर्षो को छोड़ दिया जाए तो। जब से कि देश के प्रति मेर प्रेम और गर्व में शुष्कता आना शुरू हुई। बढ़ते भ्रष्टाचार, पसरती गरीबी और अशिक्षा देखकर मैंने भारी बोझ और तनाव महसूस किया।
खुशी की बात है कि अब एक बार फिर से कुछ नई झंकार सुनाई देने लगी है। महसूस होने लगा है कि सचमुच मेरा देश निराला है। भारत में प्रजातंत्र की जो तस्वीर है, वह पहले नहीं थी। एक ऐसा देश, जिसका सब कुछ लूट कर, उलझन-झंझटों को सुलझाए ब़गैर उसे जर्जर अवस्था में छोड़ दिया गया, वह विगत 60 वर्षो से एक प्रजातंत्र के रूप में चला आ रहा है। ऐसा देश, जिसके बार में सोचा जा रहा था कि विभाजन के बाद वह अपनी तमाम आंतरिक विसंगतियों के चलते टुकड़े-टुकड़े हो जाएगा।
आज वह, न सि़र्फ अपनी एकजुटता बनाए हुए है, बल्कि आन-बान के साथ खड़ा है। आज वह दुनिया के सशक्त राष्ट्रों में गिना जाता है, जिसका भविष्य कहीं और Êयादा मजबूत और सफल दिख रहा है। बतौर भारतीय, मेर गर्व और स्वाभिमान में फिर से गर्माहट महसूस होने की यह वजहें पर्याप्त हैं।
हालांकि, आज भी ढेरों समस्याएं हैं। उनमें गरीबी मुख्य मुद्दा है। छोटे कस्बे और गांव आज भी मूलभूत सुविधाओं से महरूम हैं। गरीब और गरीब तथा अमीर और अमीर एवं शक्तिशाली होते जा रहे हैं। हां, मध्यम वर्ग सुशिक्षित है और कल के सुंदर भारत का मार्ग प्रशस्त करते हुए फलफूल रहा है।
वास्तव में भारतीय ज्ञानवान और शिक्षित होने के लिए आतुर हैं और मेहनत के सुखद फल का आनंद ले रहे हैं। हां, हमार नेतागण निश्चित रूप से इतने स्वप्नद्रष्टा, प्रभावशाली और जिज्ञासु नहीं हैं, जो देश की राहें बदलने की कोशिश करें। वास्तव में यह क्षमता आमजन में ही है। हमार अंदर प्रगति, सफलता और विकास की तड़प होनी चाहिए। हां, सब एकदम से नहीं हो सकता। हर चीज एक साथ हासिल नहीं की जा सकती। इसलिए हमें एक-एक कर मजबूती के साथ आगे बढ़ना चाहिए और देश के विकास में अपना भरपूर योगदान देना चाहिए। हमें शिक्षा, स्वतंत्र उद्यम और व्यापार की महत्ता समझनी चाहिए।
अपने शहरों के आधारतंत्र को बढ़ाना चाहिए। क्योंकि एक सुंदर और सुदृढ़ शहर ही अपने रहवासियों को बेहतर सोच-विचार की क्षमता और जीवन दे सकता है, जो आगे चलकर देश की उन्नति और समृद्धि के सहभागी होंगे। हमें देश के निम्न वर्गो को Êयादा से Êयादा रोजगार-व्यवसाय मुहैया कराना चाहिए, जो देश के लिए ता़कतवर बांहों का काम कर सकें। हमें हमेशा वोट डालने के अधिकार का उपयोग करना चाहिए। जी-जान से मेहनत करना चाहिए, जिससे दुनिया हमार देश को एक सशक्त, समृद्ध देश के रूप में देखे। और यह होगा।
लेखिका तनुजा चंद्रा प्रसिद्ध फिल्म निर्देशक है