इंदौर कमला नेहरू प्राणी संग्रहालय में रह रहे जानवरों को नए स्थान (कैदीबाग) पर शिफ्ट करने के लिए शुरू किया गया कैदीबाग प्रोजेक्ट खटाई में पड़ सकता है। केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण ने 14 करोड़ के इस प्रोजेक्ट के लिए 7 करोड़ से ज्यादा राशि देने से साफ इंकार कर दिया है। वह अब तक ढ़ाई करोड़ रुपए दे चुका है। इधर, पहले ही आर्थिक बदहाली का सामना कर रहे नगर निगम के लिए शेष राशि जुटाना आसान नहीं होगा।
धीमी रफ्तार पर भी फटकार
प्राधिकरण ने पुराने चिड़ियाघर और कैदीबाग के बीच से जानवरों को ले जाने के लिए बन रहे पुल का काम बेहद धीमी गति से चलने पर भी पत्र के जरिये नाराजगी जताई है। साथ ही यह भी कहा है कि प्रोजेक्ट की अगली किस्त वह तब ही देगा जब पुरानी राशि से हुए कार्यो का हिसाब मिल जाएगा।
आधे जानवरों को नसीब नहीं होगा नया घर
चिड़ियाघर प्राधिकरण द्वारा जानवरों को रखने के लिए पिंजरों की साइज तय की गई है। उसी के मुताबिक कैदीबाग में नए पिंजरे बनाए जाना हैं। अब तक केवल आधा दर्जन पिंजरे ही बन पाए हैं। योजना के तहत यहां करीब 12 बड़े और 21 सामान्य आकार के पिंजरे बनाए जाने हैं।
साथ की सुविधा के लिए पूरे परिसर में टाइल्स, केंटीन और जानवरों के हर पिंजरे में अलग से दो कक्ष व कुंड बनाए जाने की योजना थी लेकिन अब प्राधिकरण से मिलने वाली राशि से केवल 20 पिंजरे ही बनाए जा सकेंगे। पुराने चिड़ियाघर में रह रहे हर जानवर को नया घर नसीब नहीं हो पाएगा। साथ ही आधे पिंजरों में पानी के कुंड और हर पिंजरे में एक-एक कक्ष नहीं बन पाएगा।
..तो वन विभाग के हाथों में होगा जू
अगर चिड़ियाघर प्रशासन चिड़ियाघर प्राधिकरण की शर्तों को पूरा नहीं करता है या प्रोजेक्ट पूरा करने में लेटलतीफी का यही सिलसिला चलता रहा तो निगम की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। सूत्रों के मुताबिक चिड़ियाघर के रखरखाव का जिम्मा प्राधिकरण वन विभाग को भी सौंप सकता है। वैसे भी देश के ज्यादातर बड़े शहरों में चिड़ियाघर को संभालने की जिम्मेदारी वन विभाग के हाथों में ही है।
जल्द शिफ्ट करेंगे कुछ जानवर
चिड़ियाघर प्रभारी व नगर शिल्पज्ञ अशोक बैजल का कहना है पुल की डिजाइन ठीक नहीं थी व जगह भी कम थी इसलिए उसे बदला गया। अब काम शुरू हो रहा है जिसे जल्द पूरा कर लिया जाएगा। केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण जितनी भी राशि देगा उसी में सारा काम पूरा करने की कोशिश की जाएगी। महत्वपूर्ण काम पहले किए जाएंगे।
प्रभारी रमाकांत शुक्ला के अनुसार कुछ जानवरों को कैदीबाग स्थित नए पिंजरों में रखने का काम जल्द शुरू होगा। वहां बिजली-पानी की व्यवस्था पहले ही की जा चुकी है। महापौर डॉ. उमाशशि शर्मा का कहना है शेष राशि जुटाने के प्रयास किए जाएंगे।
जवाब मांगा है
>> हमने इंदौर नगर निगम को पत्र भेजा है। उसमें कई बातों का जवाब मांगा गया है। कैदीबाग प्रोजेक्ट की अगली किस्त भी तब ही भेजी जाएगी जब पिछली राशि का पूरा हिसाब मिल जाएगा। हम इंदौर चिड़ियाघर को सात करोड़ से ज्यादा राशि नहीं दे सकते।
-बी.आर. शर्मा, मेंबर सेक्रेटरी, केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण नई दिल्ली