अजमेर. पाकिस्तान के दो नागरिक गगवाना में जमीन के मालिक हैं। तहसीलदार और पटवारी की लापरवाही से उनके नाम नामांतरण भी हो गया। खुफिया पुलिस ने इस मामले में जांच पूरी कर ली है। सीआइडी जांच रिपोर्ट जिला प्रशासन को भेजेगी।
खुफिया पुलिस को शिकायत मिली थी कि पीली कोठी इम्पीरियल रोड निवासी सैयद यूसुफ अली शाह पुत्र माकूब अली शाह ने पुश्तैनी जायदाद में पाकिस्तानी बेटे व बेटी को भी हिस्सा दिया है। मामले को गंभीर मानते हुए सीआइडी जोन ने मामले की तफ्तीश की। तफ्तीश में सामने आया कि शाह की तमाम सम्पत्तियों में शामिल गगवाना में करीब सवा बीघा जमीन का नामांतरण पांच महीने पहले मई में शाह के छह पुत्र-पुत्रियों के नाम किया गया था। उनमें लंबे अर्से से पाकिस्तान में रह रहे आसिफ अली व उसकी बहिन जकिया भी शामिल हैं। दोनों की शादी पाकिस्तानी परिवारों में हुई थी और उन्हें पाकिस्तान की नागरिकता प्राप्त है।
करीब डेढ़ साल पहले इंतकाल के बाद उसके बेटे-बेटियों के बीच सम्पत्ति को लेकर विवाद हो गया और नामांतरण के बाद पारिवारिक फूट से विदेशी नागरिकों के नाम जमीन का मामला उजागर हो गया। खुफिया पुलिस के अधिकारियों ने जांच में हलके के तत्कालीन पटवारी प्रेमप्रकाश शर्मा को गड़बड़ी का जिम्मेदार ठहराया। शर्मा के बयान दर्ज किए गए। उसने सफाई दी कि शाह की वसीयत के आधार पर उसकी संतानों के नाम जमीन का नामांतरण किया गया था। उनके मूल निवास और भारतीय नागरिकता का प्रमाण पत्र पार्षद सुभाष खंडेलवाल ने जारी किया था। उसे अधिकृत मानते हुए नामांतरण की कार्रवाई कर दी गई। पार्षद खंडेलवाल से भी खुफिया विभाग ने तफ्तीश की।
खंडेलवाल ने कहा कि पीलीकोठी इम्पीरियल रोड निवासी युसुफ अली शाह उनके वार्ड के निवासी और मतदाता थे, इस आधार पर प्रमाणपत्र जारी किया गया।
* जांच रिपोर्ट का अवलोकन किया जा रहा है। मामले की जानकारी जिला प्रशासन को दी जाएगी।
-गजानंद वर्मा, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक, सीआइडी
‘पटवारी जिम्मेदार’
तहसीलदार श्रीकिशन सारस्वत ने विदेशी नागरिकों के नाम जमीन नामांतरण के मामले में हलका पटवारी को जिम्मेदार माना है। सारस्वत ने ‘भास्कर’ को बताया कि पटवारी को जमीन के हकदार के बारे में पुख्ता साक्ष्य जुटाने के बाद कार्रवाई करनी चाहिए। नियमानुसार जमीन का नामांतरण उत्तराधिकारियों के नाम होता है, इसकी पुष्टि वंशावली से होती है। विदेशी नागरिकता प्राप्त व्यक्ति नामांतरण का हकदार नहीं होता है। सारस्वत का कहना है, मामले की जांच और गलती को दुरुस्त किया जाएगा।
यह है नियम व प्रक्रिया
कानून के मुताबिक कोई भी विदेशी नागरिक भारत में स्थायी सम्पत्ति नहीं खरीद सकता है। पुश्तैनी जायदाद में भी उसका हक नहीं माना जाता है। जमीन के नामांतरण की प्रक्रिया के तहत तहसीलदार और हलके का पटवारी जमीन मालिक के भारतीय नागरिक और मूल निवासी होने का प्रमाण पत्र संबंधित सरपंच, वार्ड पंच और पार्षद के प्रमाणीकरण के आधार पर मानते हुए कार्रवाई करते हैं। शाह की सम्पत्ति के मामले में खुफिया पुलिस की जांच में पटवारी प्रेमप्रकाश शर्मा ने भी बयान में नियम का हवाला दिया है। लेकिन, जमीन के मालिकों की खुद जांच करने की बजाय सिर्फ दस्तावेजों पर निर्भर रहने से विदेशियों के नाम नामांतरण की चूक हो गई।
विदेशियों की जमीन : पहले भी विवाद
* अजमेर में विदेशियों की जमीन को लेकर पहले भी विवाद रहे हैं। श्रीलंका के निर्वासित नेता वरदराजन पेरूमल ने जयपुर रोड पर घूघरा के नजदीक फार्महाउस खरीदा था। चेक लौटने के जिस मामले में दो दिन पहले पेरूमल सपत्नीक अदालत में बयान करवाने अजमेर आए थे, फार्महाउस खरीदने को हुए लेन-देन के दौरान ही यह विवाद हुआ था। पेरूमल से राजस्थान छुड़वाने के पीछे एक कारण जमीन की खरीद भी बना था।
* कुछ महीने पहले, फुटबॉल के दीवाने स्पेन निवासी जॉन मैनुअल रोजास पुष्कर में खेल-मैदान की जमीन खरीदने के कारण विवाद में आए थे। रोजास ने जमीन खरीद ली थी, लेकिन प्रशासन ने उसका नामांतरण करने से इन्कार कर दिया था। इसके विरोध में, रोजास ने आमरण अनशन भी किया था।