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Chhattisgarh
Bilaspur Bilaspur बिलासपुर. इलाज का खर्च नहीं पटाने के कारण अपोलो हास्पिटल में मजिस्ट्रेट की बेटी को बंधक बना लिया गया है। मजिस्ट्रेट ने बेटी को छुड़ाने के लिए कलेक्टर व एसपी से गुहार लगाई है।
14 अगस्त 2007 को गनियारी के पास सेंट जेवियर्स स्कूल बस पलट गई थी। इसमें एक बच्ची की मौत हो गई थी, वहीं 4 अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए थे। घायलों में गनियारी निवासी मजिस्ट्रेट महेश राज की बेटी यशस्वी ध्रुव व विनोद द्विवेदी की बेटी गरिमा द्विवेदी को अपोलो हास्पिटल में भर्ती कराया गया था।
हादसे के बाद सेंट जेवियर्स स्कूल प्रबंधन ने अपोलो प्रबंधन को पत्र लिखकर घायल छात्रों की इलाज की जिम्मेदारी ली थी। 10 सितंबर को हास्पिटल से दोनों बच्चियों को डिस्चार्ज कर दिया गया है, लेकिन शुल्क जमा नहीं होने के कारण उन्हें नहीं छोड़ा जा रहा है।
मजिस्ट्रेट श्री राज ने जब स्कूल प्रबंधन से इस विषय में चर्चा की तो वे सौदे पर उतर गए। उन्हें 1 लाख 20 हजार रुपए का बिल दिया गया है, जबकि स्कूल प्रबंधन केवल 50 हजार रुपए देने की बात कह रहा है। इसी तरह विनोद द्विवेदी की बेटी गरिमा के इलाज में 2 लाख 20 हजार रुपए खर्च हुए हैं।
अपोलो के चिकित्सकों ने यशस्वी को फिंगर स्पेशलिस्ट के पास पूना या मुंबई ले जाने की सलाह दी है, लेकिन अपोलो से छुट्टी नहीं मिलने के कारण उन्हें इलाज में भी बाधा हो रही है। मानसिक रूप से व्यथित श्री राज मामले की शिकायत लेकर कलेक्टर के पास पहुंचे। कलेक्टर के शहर से बाहर होने के कारण उन्होंने एसडीएम कार्यालय में ज्ञापन दिया।
इस मामले में श्रीराज की माता से चर्चा हुई तो उन्होंने बताया कि शुरुआत में उन्होंने स्कूल प्रबंधन फोन पर चर्चा की तो उन्होंने आश्वासन दिया था, लेकिन अब वे फोन भी नहीं उठाते। इस मामले में अधिक जानकारी के लिए सेंट जेवियर्स स्कूल प्रबंधन से चर्चा का प्रयास किया गया, लेकिन उनसे संपर्क नहीं हो सका।
>> हादसे के बाद घायल बच्चों के इलाज की जिम्मेदारी स्कूल प्रशासन की है। अपोलो हास्पिटल इलाज में खर्च हुई रकम मांग रहा है। चूंकि गलती स्कूल प्रशासन की है, इसलिए स्कूल प्रशासन पर कार्रवाई की जाएगी।
-संजय अग्रवाल, एसडीएम
>> हमने 10 सितंबर से यशस्वी राज का डिस्चार्ज पेपर तैयार कर लिया है। इलाज का खर्च देकर वे बच्ची को ले जा सकते हैं। फीस पटाने का विवाद स्कूल प्रबंधन व बच्ची के माता-पिता के बीच है। इसमें हमारी कोई भूमिका नहीं है। हालांकि स्कूल प्रबंधन ने हमें पत्र लिखकर इलाज का खर्च उठाने की बात की थी।
-श्रीमती सुजाता जयराम, एजीएम आपरेशंस