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महामारी न बन जाए दिल की बीमारी!

कोलकाता : अनियमित दिनचर्या, खानपान में लापरवाही और तनाव के चलते भारतीय युवा जिस तेजी से दिल की बीमारी के शिकार हो रहे हैं, उसे देखते हुए कहा जा सकता है कि आने वाले दिनों में हृदयरोग एक महामारी के रूप में सुनामी से ज्यादा घातक साबित होगा। प्रख्यात हृदयरोग विशेषज्ञ डॉ. प्रतीक्षा रीग देब का कहना है कि 2010 तक भारत में दुनिया के सर्वाधिक हृदयरोगी होंगे।

2015 तक दिल की बीमारी से विश्व भर में मरने वाले 60 फीसदी लोग भारत के ही होंगे। फिलहाल देश में छह करोड़ लोग दिल की बीमारी से पीड़ित हैं, जबकि 18 करोड़ और लोगों पर इस बीमारी का खतरा मंडरा रहा है।

बचाव ही बेहतर इलाज डॉ. देब ने यहां शनिवार को एक प्रेस वार्ता में कहा कि दिल के दौरे को रोकने का सबसे कारगर तरीका इस बीमारी से बचाव है। अनियमित खानपान, कसरत न करने और शराब, धूम्रपान जैसी आदतों के कारण युवाओं में डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर और हृदयरोग का खतरा बढ़ रहा है।

भारत में दिल का रोग* 2010 तक दुनिया के सर्वाधिक हृदयरोगी भारत में होंगे। * 2015 तक दिल से मरने वालों लोगों में 60 फीसदी लोग भारत के ही होंगे। * 6 करोड़ लोग भारत में दिल की बीमारी से पीड़ित हैं।* 18 करोड़ लोगों पर इसका खतरा।





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