जालंधरजन्म, हंसी, खुशी, दर्द, सहनशीलता से लेकर मौत तक इंसान को औरत के सहारे की जरूरत होती है, लेकिन समाज में कोई उनकी पहचान को मानने को तैयार नहीं। विरसा विहार में स्कल्पचर्स आर्टिस्ट बासुदेव बिस्वास की कलाकृतियों में महिलाओं की विभिन्न छवि साफ झलकती है।
इस एग्जीबिशन में उनके 35 स्कल्पचर्स और 25 ड्राइंग्स प्रदर्शित की गई हैं। ये सभी औरतें कद की लम्बी हैं, मानो सब मर्द बौने नजर आते हों और नाच भी रही हैं, लेकिन फिर भी इन के चेहरे उदास हैं। इस बारे में बासु का कहना है, ये मेरी जिंदगी के प्रति संवेदना का प्रतीक है। राह चलते कोई खूबसूरती निहारता हूं, तो कलाकृति के लिए नया सब्जैक्ट मिल जाता है।
कद लम्बा इस लिए है, शायद अपनी छोटी हाइट की वजह से मैं चाहता हूं मेरी कलाकृतियों का कद हमेशा ऊंचा रहे। एग्जीबिशन का उद्घाटन राज गायक हंस राज हंस ने किया। कलाकृतियां देखने के बाद उन्होंने कहा, जादू वही है कामिल जो सर चढ़ के बोले, काबे में शैख ने की इश्क बुतां की बातें..हर कलाकार के अंदर रूह एक ही होती है, चाहे कला का जरिया कोई भी हो।