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लिंगदोह सिफारिशों पर दावेदार फेल!

चंडीगढ़ पीयू स्टूडेंट काउंसिल चुनावों में अपनी दावेदारी जता रहे उम्मीदवार ही जेएम लिंगदोह कमेटी की सिफारिशों पर खरे नहीं उतरते। देश भर की यूनिवर्सिटीज और कॉलेजों के स्टूडेंट काउंसिल चुनावों के लिए सुप्रीम कोर्ट ने जेएम लिंगदोह कमेटी की सिफारिशों को लागू किया है।

पीयू द्वारा बनाए गए स्टूडेंट काउंसिल चुनाव संविधान में जेएम लिंगदोह की सिफारिशों से छेड़छाड़ का मामला कोर्ट में विचाराधीन है। जेएम लिंगदोह कमेटी की सिफारिशों पर गौर करें तो पीयू में दोनों बड़े स्टूडेंट ऑर्गेनाइजेशंस की ओर से इस बार प्रोजेक्ट किए जा रहे कैंडिडेट चुनाव लड़ने के योग्य नहीं हैं। दोनों ही संगठनों के कैंडिडेट कहीं न कहीं सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइंस पर खरे नहीं उतरते।

किन सिफारिशों पर खरे नहीं उतरते : पीयू कैम्पस की छात्र राजनीति पुसू और सोपू के इर्द-गिर्द ही घूमती रही है। जेएम लिंगदोह कमेटी की सिफारिशों के बाद सुप्रीम कोर्ट द्वारा इस मामले में दिए गए निर्देश के पैरा नंबर 6.5.7 में क्रिमिनल रिकॉर्ड वाला कोई भी स्टूडेंट चुनाव नहीं लड़ सकता, भले ही वह किसी मामले में सिर्फ आरोपी ही हो। इस कंडीशन को दोनों ही संगठनों के दावेदार पूरा नहीं करते।

सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के पैरा नंबर 6.5.4 के मुताबिक स्टूडेंट का कोई पिछला एकेडमिक एरियर नहीं होना चाहिए। यहां दोनों संगठनों के संभावित दावेदार गाइडलाइंस को फॉलो करते हैं। पैरा नंबर 6.5.6 के मुताबिक प्रत्याशी मुख्य पद के लिए सिर्फ एक बार चुनाव लड़ सकता है, जबकि कार्यकारिणी के लिए दो बार। सोपू प्रत्याशी इस गाइडलाइन पर फिट बैठता है, लेकिन पुसू प्रत्याशी यह कंडीशन फॉलो नहीं करता।

क्या कहते हैं स्टूडेंट लीडर हम जेएम लिंगदोह कमेटी की सिफारिशों को पूरा करने वाले को ही अपना प्रत्याशी बनाएंगे। हम सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइंस का पूरा समर्थन करते हैं। -अभिषेक पुरी, प्रेजिडेंट पुसू

संभावित प्रत्याशी मैं कंडीशन को पूरी तरह फॉलो करता हूं। दरअसल लिंगदोह कमेटी की सिफारिशें पूरी तरह क्लीअर नहीं हैं। इनमें संशोधन की जरूरत है। -हरप्रीत सिंह मुल्तानी, प्रेजिडेंट सोपू संभावित प्रत्याशी





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