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विदेशों में हारे हुए मामलों पर भारत में सुनवाई नहीं

नई दिल्ली.अप्रवासी भारतीयों को साफ संदेश देते हुए हाईकोर्ट ने एक फैसले में यह कहा कि विदेशों में हारे हुए मामलों पर ठीक उसी आधार पर भारत की अदालत में सुनवाई नहीं हो सकती। एक अप्रवासी भारतीय की पत्नी द्वारा अमेरिका की अदालत में मिली नाकामी के बाद दिल्ली हाईकोर्ट में दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए जस्टिस एसएन ढींगरा ने यह आदेश दिया।

गौरतलब है कि याचिकाकर्ता महिला की शादी 1993 में अमेरिका में रहने वाले एक अप्रवासी भारतीय से हुई थी। शादी के पांच साल बाद दोनों में संबंध इतने बिगड़ गए कि महिला के पति ने अमेरिका की अदालत में तलाक की अर्जी दाखिल कर दी। 1999 में दोनों के बीच तलाक हो गया।

तलाक को मंजूरी देते हुए कोर्ट ने कहा था कि दहेज में दिए गए सामानों को भी वापस कर दिया जाए । लोकिन महिला के पति और उनके परिजनों ने दहेज में मिले सामानों को वापस नहीं किया। इसके बाद महिला ने अमेरिका की ऊपरी अदालत में अर्जी दी, लेकिन अदालत ने इस अर्जी को खारिज कर दी।

वर्ष 2002 में महिला वापस भारत लौट आई और अपने ससुराल वालों के खिलाफ आपराधिक मुकदमा दायर कर दिया। इस पर उसके ससुराल वालों ने हाईकोर्ट में अपील की और अपने खिलाफ आपराधिक मुकदमे को वापस लेने को कहा था। ससुराल वालों का कहना था कि महिला यह केस अमेरिका की अदालत में हार चुकी है।





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