अहमदाबाद. 195 दिन अंतरिक्ष में बिताने का रिकार्ड बना चुकीं भारतवंशी अंतरिक्ष यात्री सुनीता विलियम्स ने अपनी भारत यात्रा के तीसरे दिन शनिवार को यहां
विद्यार्थियों के साथ अपने अनुभव बांटे। उन्होंने यहां गुजरात विश्वविद्यालय के कार्यक्रम में हिंदी-गुजराती न बोल पाने के लिए जहां विद्यार्थियों से क्षमा मांगी, वहीं दूसरी ओर अपने रिकॉर्ड तोड़ने की चुनौती भी दी।
अंतरिक्ष यात्रा के अनुभव सुनकर रोमांचित विद्यार्थियों (विज्ञान संकाय) से सुनीता ने कहा, ‘आप मेधावी हैं और दृढ़ निश्चय से मनचाही उपलब्धि हासिल कर सकते हैं। मैंने जो कुछ हासिल किया है या रिकार्ड बनाया है, उसे तोड़ने की मैं आप सबको खुली चुनौती देती हूं। युवाओं को इसे स्वीकारना चाहिए।’
बाल काढ़ना तक मुश्किल : अतंरिक्ष स्टेशन में ठहरने और अंतरिक्ष में चहल-कदमी के अनुभव सुनाते हुए सुनीता ने कहा कि अतंरिक्ष यान में बाल काढ़ना, ब्रश करना, खुराक लेना या चहल-कदमी करना पृथ्वी जितना आसान नहीं है। इन सबके अलावा मशीन पर काम एवं ऑक्सीजन पैदा करने के लिए कड़ी मेहनत करनी पड़ती है।
यान को नियंत्रित करना चुनौतीपूर्ण : सुनीता ने बताया कि अंतरिक्ष में यान की गति प्रति सैकंड पांच मील होती है। इसको नियंत्रित करना और यान को भ्रमण कक्षा में स्थिर रखने के लिए सभी सदस्यों को चौकन्ना रहना पड़ता है।
सुनीता युवाओं की प्रेरणा स्रोत : मोदी
गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने सुनीता को युवाओं की प्रेरणास्रोत बताया। कार्यक्रम में सुनीता को गुजरात विश्वविद्यालय की ओर से स्मृति चिह्न् देकर सम्मानित किया गया। इस अवसर उनके पिता डा. दीपक पंड्या भी उपस्थित थे। इससे पहले सुनीता ने राजस्थान सेवा समिति एवं विश्व ब्राrाण आर्गनाइजेशन के कार्यक्रमों में भी शिरकत की। दोनों जगह भव्य स्वागत के बाद उन्हें सम्मानित किया गया।