जालंधर. '1982 में जब मैं मुक्त अर्थ-व्यवस्था की बात करता था तो सब मेर खिलाफ थे। मीडिया का भी मुझे समर्थन नहीं मिला। यह सिद्धांत नकारने वालों का अब इसी पर भरोसा है।' यह कहना है एनआरआई लॉर्ड स्वराज पॉल का, वे शनिवार को जालंधर आए हुए थे। यह संस्थान उन्हीं की बेटी के नाम पर गठित चैरिटेबल ट्रस्ट अंबिका पॉल फाउंडेशन की ओर से संचालित होगा।
पॉल ने कहा कि भारत के कारोबारियों को ब्रिटेन जैसी अग्रणी अर्थव्यवस्थाओं में निवेश करना चाहिए, वजह यह कि यह फ्री इकोनॉमी है। पिछले चार साल में करीब 570 कारोबार लंदन में स्थापित हो चुके हैं।
लॉर्ड पॉल मानते हैं कि बुलंदियों पर पहुंचने के लिए अभी पंजाब को लंबा सफर तय करना है। वतन वापसी के सवाल पर लॉर्ड ने कहा वे देश के लिए बहुत कुछ करना चाहते हैं, लेकिन यहां लौटना संभव नहीं।
मैं ब्रिटिश हूं खुद को ब्रिटिश मानने वाले पॉल का कहना है, मैं नहीं चाहता कि मुझे एशियाई समझा जाए। मैं ब्रिटेन के हाउस ऑफ लार्ड्स का सदस्य हूं और इसके लिए मुझे वहां का नागरिक होना जरूरी है। मैं नहीं चाहता कि कोई एशियाई समझकर मेरा समर्थन कर।
नुकसान ही होता है एटमी करार से अमरीका और भारत के बीच एटमी करार पर पॉल ने कहा भारतीय सरकार को इसके नतीजों पर ध्यान रखते हुए फैसला लेना चाहिए। स्वराज पॉल का तर्क है कि यह सोचना गलत होगा कि यह करार लोगों की भलाई के लिए है, इससे हमेशा नुकसान ही होता है।