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391 दोषी, फिर भी ठाठ से नौकरी

चंडीगढ़.पंजाब में 2002 से दिसंबर 2006 के बीच करप्शन के ज्यादातर मामलों में 391 अफसरों और कर्मचारियों को अदालतों ने दोषी करार दिया है। बावजूद इसके इनमें से काफी कर्मचारी अभी भी अपने पदों पर डटे हैं। इसकी वजह उनकी कंट्रोलिंग अथॉरिटीज का इस हकीकत से अनजान होना है।

कुछ दोषियों को हाल ही में तब नौकरी से हाथ धोना पड़ा जब इस बारे में पंजाब विजिलेंस कमीशन के तत्कालीन चेयरमैन ने स्टेट विजिलेंस ब्यूरो से अदालतों द्वारा दोषी करार अफसरों/कर्मचारियों की सूचना मुहैया कराने को कहा।

दोषी घोषित होने के बाद की स्थिति: पंजाब विजिलेंस कमीशन के तत्कालीन चेयरमैन जस्टिस अमर दत्त ने 14 मार्च 2007 को गवर्नर को सौंपी रिपोर्ट में कहा था कि राज्य में भ्रष्टाचार के दोषी करार कई अफसर नौकरी कर रहे हैं क्योंकि उनकी कंट्रोलिंग अथॉरिटी को हकीकत पता नहीं है।

विजिलेंस नहीं दे पाया जानकारी: रिपोर्ट में कहा गया था कि कमीशन ने विजिलेंस ब्यूरो से ऐसे मामलों में सजा के खिलाफ पेंडिंग अपील का रिकॉर्ड मांगा तो पता चला कि ब्यूरो ने ऐसा कोई रिकॉर्ड संभाल कर नहीं रखा है। ब्यूरो कोई ठोस जानकारी मुहैया नहीं करा पाया। फिर भी ब्यूरो ने जितनी भी जानकारी दी उससे कई कर्मचारियों की नौकरी चली गई।

दोषी करार होने के बाद की प्रक्रिया:

पंजाब सिविल सर्विसेज रूल्स (पनिशमेंट एंड अपील) 1970 के अनुसार किसी भी मामले में कोर्ट द्वारा दोषी करार कर्मचारी को संबंधित विभाग उसी के मुताबिक सजा देगा। जैसे कि नौकरी से निकालना, प्रमोशन और इंक्रीमेंट रोकना। कोर्ट के आदेश संबंधित कर्मचारी और उसके विभाग के पास भी जाते हैं। सजा के खिलाफ कर्मचारी ऊपरी अदालत में अपील कर सकता है। करप्शन मामलों में दोषी करार कर्मचारी के संबंध में सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि ऐसे कर्मचारी को स्टे न दें।

कौन विभाग कितना दागीज्यादा दोषी रेवेन्यू व इरिगेशन के: दोषियों में 129 रेवेन्यू और इरिगेशन डिपार्टमेंट के हैं। इनमें 3 एसडीओ, 1 तहसीलदार, 1 नायब तहसीलदार, 12 कानूनगो, 1 डिप्टी कलेक्टर और बड़ी संख्या में पटवारी शामिल हैं।

इलेट्रिसिटी बोर्ड दूसरे नंबर पर: दूसरे नंबर पर पंजाब स्टेट इलेक्ट्रिसिटी बोर्ड है। इसके 57 कर्मचारी दोषी करार दिए गए हैं। इनमें 5 एसडीओ, 23 जेई और अन्य कर्मचारी शामिल हैं।

तीसरे पर स्वास्थ्य विभाग: तीसरा स्थान स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग का है। इसके दोषी 22 कर्मचारियों में 3 एसएमओ, 7 मेडिकल अफसर और अन्य श्रेणियों के कर्मचारी हैं।

शिक्षा व पुलिस विभाग भी:

शिक्षा विभाग के 12 दोषी कर्मचारियों में 2 प्रिंसिपल, 3 हैडमास्टर और अन्य शामिल हैं। पुलिस के 20 कर्मचारी दोषी करार दिए गए हैं। यह खुलासा एडवोकेट एचसी अरोड़ा द्वारा राइट टू इन्फॉर्मेशन के तहत सरकार से मांगी जानकारी के बाद हुआ है।





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