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एड्रेस प्रूफ के अभाव में भी खुल सकता है बैंक खाता

नई दिल्ली. नए शहर में जाने के बाद विभिन्न जरूरतों के लिए स्थानीय बैंक खाते का होना आवश्यक होता है। खाता खुलवाने में सबसे बड़ी समस्या होती है एड्रेस प्रूफ की, जो बैंक-खाता खुलवाने के लिए अनिवार्य है। बैंक द्वारा दिए गए खाता-विवरणी का उपयोग किसी अन्य सेवा की प्राप्ति के लिए एड्रेस प्रूफ के तौर पर किया जा सकता है। इस खाता विवरणी को एड्रेस प्रूफ के रूप में पेश कर आप गैस कनेक्शन या मोबाइल फोन ले सकते हैं। सामान्यतया, बैंक खाता खुलवाने के लिए एड्रेस प्रूफ के तौर पर बिजली या पानी के बिल की मांग करते हैं, लेकिन जो नया-नया शहर में आया है वह बिजली या पानी का बिल कहां से लाए?

यदि आप नए शहर में हैं तो अपने मकान मालिक से बात करके लीज एग्रीमेंट बनवा लें और बैंक में उसी को अपने एड्रेस प्रूफ के तौर पर पेश कर दें। यह दस्तावेज बैंक में आपके खाता खोलने के भी काम आएगा।

एक प्राइवेट बैंक के अधिकारी ने जानकारी दी कि ‘अपने ग्राहक को जानिए वाला नियम पहले से सख्त हो गया है। हम लोगों को इस बात की तसल्ली करनी होती है कि ग्राहक असली है। बैंक की यह जिम्मेदारी होती है कि वह अपने ग्राहक के इतिहास को जानें।’

खाता ट्रांसफर कराना भी संभव: एड्रेस प्रूफ के झंझट से निजात का एक तरीका यह है कि आप अपने बैंक खाते का स्थानांतरण करवा लें। बैंक अधिकारी ने बताया कि ‘एक केंद्रीकृत बैंक का खाता ग्राहक के साथ-साथ चलता है। अगर आपका खाता जयपुर के बैंक में है और आप दिल्ली रहने आ रहे हैं तो आपका बैंक खाता भी आपके साथ दिल्ली आ सकता है। आप अपने बैंक को यह सूचित कर सकते हैं कि यद्यपि आपका स्थायी पता जयपुर का है और आपके पत्राचार का पता दिल्ली का होगा’, लेकिन इससे एड्रेस प्रूफ वाली समस्या का समाधान नहीं होता है।

नियोक्ता का पत्र भी सहारा: बैंक अधिकारी कहते हैं कि नियोक्ता या संस्थान से इस संदर्भ में पत्र लेना कठिन नहीं है। एक्सिस बैंक के रीटेल बैंकिंग के प्रबंधक रत्नेश कुमार कहते हैं कि ‘भले ही कोई शहर में नया हो लेकिन उसके रहने का ठिकाना तो कहीं होगा। वह लीज एग्रीमेंट एड्रेस प्रूफ के रुप में पेश कर सकता है। अगर रहने का ठिकाना कंपनी द्वारा उपलब्ध कराया गया है तो वह कंपनी से इस संबंध में पत्र ले सकता है कि कंपनी का उक्त कर्मचारी इस पते पर रहता है।’

अगर कोई व्यक्ति पढ़ाई के सिलसिले में आया है तो वह अपने संस्थान से इस संदर्भ में पत्र ले सकता है। अगर इस प्रकार के दस्तावेज उपलब्ध नहीं है तो वह ऐसे व्यक्ति की सिफारिश का सहारा ले सकता है जिसका बैंक के साथ पुराना और मजबूत रिश्ता हो।





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syed asif
Monday, 24th Sep 2007, 12:32
sarkari vubhago ka janta ke bare me yeh sochna ki sab naukri pesha hi hon koi jaroori nahi aam admi swavyavsayi bhi to ho sakta hai aise wah kisi bhi nagar ko jaha use apne karya se labh prapt hotaho ja sakta hai awam apna swaym ka vyavsay kar sakta hai in peristhitiyon me us se adress proof ki mang kaha tak sahi hai jab ki wah khud is shahar me abhi naya hai wastava me us se apna parichay patra ya matdata parichay patra ki mang ki jani chahiye bhale hi wah bharat desh ke kisi bhi shahar ka niwasi kyu na ho