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जोश, जज्बे और हौसले को सलाम

आलेख.ayaz जीतने के चाहिए चार गेंदो पर छह रन और सिर्फ एक विकेट बाकी, इससे ज्यादा करीबी मामला नहीं हो सकता था। यह एक यादगार फाइनल मैच रहा और ट्वेंटी-२0 विश्वकप का आयोजन काफी सफल रहा। लेकिन इसमें कौन विजेता रहा?

मैच के अंतिम क्षणों में मिस्वाह-उल-हक ने अपने पीछे खड़े खतरे की उपेक्षा कर इसे नाटकीय अंदाज में खत्म करने की भूल की। वे ऑफ स्टंप की लाइन से बाहर आए और उन्होंने नर्वस लग रहे जोगिंदर सिंह की नॉर्मल आउटस्विंगर को शॉर्ट-फाइन लेग पर खड़े श्रीसंत की ओर उछाल दिया। अचानक, पाकिस्तान के लिए सब कुछ खत्म हो गया।

लेकिन भारत के लिए इस सबकी शुरुआत कहां से हुई? निस्संदेह क्रिकेट विशेषज्ञ इसका गहन अध्ययन करेंगे और कई तरह के निष्कर्ष निकाल सकते हैं। यह भी कहा जा सकता है कि करिश्माई युवा शक्ति से ओत-प्रोत एक संतुलित टीम का चयन किया गया, या पहले दौर में पाकिस्तान पर ‘बॉल-आउट’ के जरिए मिली जीत ने टीम को नैतिक संबल प्रदान किया। या फिर यह ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड पर मिली रोमांचक जीत का नतीजा था? शायद यह इन सबका मिश्रण था। king

संभवत: यह युवाओं की कभी न हार मानने की सोच का परिणाम था, जिनमें से किसी ने भी अंतिम क्षणों तक उम्मीद का दामन नहीं छोड़ा। पूरे टूर्नामेंट के दौरान भारतीय टीम के प्रदर्शन में जो प्रतिभा, जोश, खुद पर भरोसा और जीतने की ललक का अद्भुत सम्मिश्रण नजर आया, वह फाइनल में पूरे चरम पर था।

फाइनल में हालांकि ऐसे कई मौके आए जब धोनी की टीम के हाथों से मैच फिसलता नजर आया। कुछ कमजोर गेंदे, क्षेत्ररक्षण में थोड़ी सी चूक और एक कैच ड्रॉप करने से मैच उनके हाथ से निकल सकता था। लेकिन जब-जब मैच पाकिस्तान की मुट्ठी में जाता हुआ लगता, भारत दुगने जोश के साथ पलटवार करते हुए मैच में वापस आ जाता और आखिरकार उसने यादगार जीत हासिल की।

इस अहम मैच से पहले सहवाग चोटिल हो गए। इससे टीम के मनोबल पर कोई असर नहीं पड़ा। नवोदित यूसुफ पठान ने भारत का तेज शुरुआत दिलाई, एक बेहतरीन कैच पकड़ा, डीप में बढ़िया फील्डिंग की और अपने एकमात्र ओवर में केवल पांच रन दिए। हालांकि जबरदस्त फार्म में चल रहे युवराज और धोनी के जल्दी आउट होने से भारत के औसत पर कुछ असर जरूर पड़ा, लेकिन खिलाड़ियों का मनोबल नहीं टूटा।

इस टूर्नामेंट में जोरदार प्रदर्शन करने वाले गौतम गंभीर और अपने खेल से लोगों को चकित कर देने वाले नवोदित रोहित शर्मा ने टीम के स्कोर को १५७ तक पहुंचाते हुए गेंदबाजों को जीत के लिए पर्याप्त आधार प्रदान किया। गेंदबाजों में भी देखा जाए तो लगता है कि हमारे तुरुप के पत्ते हरभजन के लिए वह दिन अच्छा नहीं था और श्रीसंत की शुरुआत भी सधी हुई नहीं थी। लेकिन इससे भी टीम के प्रदर्शन पर ज्यादा असर नहीं पड़ा।

आरपी सिंह और इरफान पठान ने पेस, लाइन और लेंथ में चतुराई से पर्वितन करते हुए जोरदार गेंदबाजी की। जोगिंदर सिंह, जिन्हें एक बार फिर आखिरी ओवर फेंकने का दायित्व दिया गया, ने अपना संतुलन बनाए रखा।

श्रीसंत ने भी वापसी करते हुए अहम क्षणों में एक जबरदस्त यॉर्कर के जरिए खतरनाक नजर आ रहे यासिर अराफात से निजात दिलाई। और हां, उथप्पा ने भी डायरेक्ट थ्रो के जरिए जोरदार शुरुआत करने वाले इमरान नजीर को रन आउट कर दिया।

तुलनात्मक रूप से कम स्कोर वाले मैच में किस तरह मिडिल ओवर्स अंतिम नतीजे में अहम साबित हो सकते हैं, यह मैच इसका गवाह है। फाइनल मैच का स्कोरिंग पैटर्न बताता है कि पहले और अंतिम पांच ओवरों के दौरान भारत का रन रेट पाकिस्तान से कम रहा। जहां पाकिस्तान ने पहले पांच ओवर में ४७ रन बनाए, वहीं भारत ३९ रन बना पाया।

इसी तरह भारत द्वारा आखिरी पांच ओवरों में बनाए गए ४४ रन के मुकाबले पाकिस्तान ने अंतिम ४.३ ओवर में ५५ रन ठोके। इससे पता चलता है कि धोनी की टीम ने इमरान नजीर द्वारा की गई धमाकेदार शुरुआत और मिस्बाह द्वारा आखिरी क्षणों में किए गए जोरदार प्रदर्शन के बाद किस तरह वापसी की। आखिरकार यह तनाव के क्षणों में संतुलन बनाए रखने का नतीजा है। कौन सी टीम दबाव के आगे बिखर गई।

मैच के दौरान कभी भारत का पलड़ा भारी रहा तो कभी पाकिस्तान का। अफरीदी ने आते ही जिस तरह जोरदार शॉट मारने की कोशिश की, उससे लगा कि पाकिस्तान दबाव में है, लेकिन मिस्बाह द्वारा सधे हुए अंदाज की गई बल्लेबाजी से लगा कि वे अंतिम क्षणों तक हार मानने वाले नहीं हैं। इस मैच में पाकिस्तान के लिए यह बात सच साबित हो गई।

जब जीत महज एक स्ट्रोक दूर थी, मिस्बाह ने ऐसा शॉट खेला जिसकी टीस उनके मन में शायद हमेशा बनी रहेगी। एक के बाद एक बेहतरीन शॉट लगा रहे मिस्बाह फाइनल मैच के हीरो लग रहे थे, लेकिन अब उन्हें एक ऐसे खिलाड़ी के तौर पर याद किया जाएगा जो मैच को हथियाने में असफल रहा। उनकी हीरोगीरी थोड़े समय तक ही रही। खेल भी निर्मम हो सकता है। खैर, देश को महेंद्र सिंह धोनी और उनकी टीम का अभिनंदन करना होगा।

-लेखक वरिष्ठ खेल पत्रकार हैं।





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