सम्पादकीय. चौबीस साल बाद 24 सितंबर को वल्र्ड कप क्रिकेट के आंगन में तिरंगा लहराया और भारत क्रिकेट के नए अवतार ट्वेंटी-20 क्रिकेट का सिरमौर बन गया। पहले जो करिश्मा कपिलदेव निखंज के नेतृत्व में रचा गया था वह महेंद्र सिंह धोनी की अगुवाई में दोहराया गया। महज 24 साल की औसत उम्र वाली यूथ ब्रिगेड से सजी टीम इंडिया ने जोश, जुनून व जज्बे का नायाब प्रदर्शन कर खिताबी सफलता ने देश के खेल इतिहास में एक स्वर्णिम पन्ना जोड़ दिया है। 
इस ऐतिहासिक उपलब्धि के बाद पूरा देश जश्न में डूबा है और टीम इंडिया पर यश और धन की बरसात हो रही है। बीसीसीआई भी बुधवार को मुंबई में विजय यात्रा के जरिए खिलाड़ियों के प्रति अपना सम्मान व्यक्त करेगी।
मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंडुलकर ने धोनी के नेतृत्व की यह कहकर प्रशंसा की है कि भारत का भविष्य सुरक्षित हाथों में है। सौरव गांगुली ने कहा कि धोनी के रूप में भारत को बढ़िया लीडर मिल गया है।
विशेषज्ञ ट्वेंटी-20 वल्र्डकप के संभावित विजेता के रूप में भारत पर कतई दाव नहीं लगा रहे थे, लेकिन कप्तान धोनी की तनावरहित होकर खेलने की प्रेरणा ने वह करिश्मा कर दिखाया जिसकी स्वयं धोनी समेत किसी को उम्मीद नहीं थी। बगैर विदेशी कोच की यह बड़ी सफलता मिलने के बाद यह सवाल भी किया जाने लगा है कि क्या टीम इंडिया को अब भी विदेशी कोच की जरूरत है?
टीम इंडिया की इसलिए भी तारीफ करनी होगी कि इस फटाफट खेल में लगभग अनुभवशून्य होने के बावजूद सभी खिलाड़ी एकजुट होकर और पूरे जोश-खरोश के साथ खेले। इतना ही नहीं, उन्होंने अपने प्रदर्शन से चार दिग्गजों-सचिन, सौरव, राहुल व जहीर खान की गैर-मौजूदगी जरा भी नहीं खलने दी।
तीन साल के छोटे-से अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट कैरियर में छोटे-से शहर के धोनी ने अपने साथियों को तनावरहित होकर खेलने का बड़ा और कारगर मंत्र देकर एक तरह से भारतीय क्रिकेट का पुनर्जागरण किया है। एक चतुर और जोशीले कप्तान के रूप में उभरे धोनी खुद तो अच्छा खेले ही, अपने साथियों से बढ़िया प्रदर्शन करवाने में कामयाब रहे।
ट्वेंटी-20 को अब तक पजामा क्रिकेट मानकर गंभीरता से नहीं लिया जा रहा था, लेकिन इसमें चौकों व छक्कों की बौछारों, नजदीकी नतीजों व बॉल आउट जैसे रोचक क्षणों का लुत्फ लोगों ने भरपूर लिया। शायद भविष्य का क्रिकेट भी यही है और अब इसे योजनाबद्ध तरीके से देश में विस्तार देने के बाद कोई आश्चर्य नहीं कि दो साल बाद इंग्लैंड में फिर से भारत का तिरंगा फहराए।