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Chandigarh Chandigarh चंडीगढ़.
पंजाब के डाक्टरों के लिए यह बड़ी राहत वाली खबर है। लापरवाही से किसी मरीज की मौत के मामले में अब उनके खिलाफ शुरुआती जांच से पहले 304-ए के तहत एफआईआर दर्ज नहीं की जाएगी। मालूम हो कि बठिंडा में 15 दिन में डाक्टरों के खिलाफ तीन मामले दर्ज हो चुके हैं।
आईएमए की पंजाब इकाई ने डा. अमृत सेठी की अगुआई में इस मुद्दे पर मंगलवार को मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल से मुलाकात की और मरीज की लापरवाही के चलते हुई मौत के मामले में एफआईआर दर्ज करने से पहले सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों पर गौर करने का आग्रह किया।
मुख्य सचिव को दिए निर्देश डाक्टरों की बात सुनने के बाद मुख्यमंत्री ने मुख्य सचिव रमेश इंद्र सिंह से कहा है कि वे डाक्टरों से बातचीत कर सभी उपायुक्तों व एसएसपी को इस संबंध में निर्देश जारी करें। इस बीच, आईएमए ने पंजाब के 160 गांव गोद लेने का फैसला किया है।
आईएमए की पंजाब इकाई की राज्यभर में 80 शाखाएं हैं। एक शाखा दो गांव गोद लेगी। इस इकाई से जुड़े डाक्टर गोद लिए गांवों में जाएंगे और मरीजों की देखभाल कर उन्हें मुफ्त दवा देंगे।
'आओ गांव चलें' की शुरुआत जल्द
'आओ गांव चलें' के नारे के साथ आईएमए जल्दी ही गांवों की तरफ रुख करेगी। डाक्टरों को जिन गांवों में जाना है, उनकी आने वाले कुछ दिनों में सूची तैयार कर ली जाएगी।
शेरगिल मामले पर गौर करेंगे गृह सचिव बच्चे की किडनी निकालने के मामले में अमृतसर के मैडिकल कालेज की प्रिंसिपल डा. शेरगिल को मुअत्तल करने का मुद्दा भी बादल के सामने उठाया गया।
आईएमए की पंजाब इकाई का मानना है कि डा. शेरगिल के खिलाफ षड्यंत्र रचा गया था। उनके रिटायर होने में एक साल का समय बाकी है, ऐसे में उन्हें मुअत्तल करने से पहले जांच कराई जानी चाहिए थी कि क्या सचमुच ही इलाज के दौरान किसी बच्चे की किडनी निकाली गई है? बादल ने राज्य के गृह सचिव को इस मामले पर गौर करने के निर्देश दिए हैं।