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बायोडीजल से चलेंगी गाड़ियां

जालंधर. डीजल की बढ़ती कीमतों से बेपरवाह अब आप चला सकेंगे गाड़ी। सिटी के स्टूडैंट्स ने बॉयोडीजल तैयार किया है जिससे डीजल पर चलने वाली गाड़ियां आसानी चल सकेंगी। सीटी इंस्टीच्यूट शाहपुर कैंपस के मैकेनिकल इंजीनियरिंग थर्ड ईयर के स्टूडैंट्स वरुण कुमार सैनी, जसवंत सिंह, पंकज चंदन, सर्बजीत सिंह और सुशांत नेगी ने कैंपस में एक तरह का बॉयोडीजल तैयार किया है इसकी मदद से डीजल से चलने वाली गाड़ियां चलाई जा सकती हैं।

डिपार्टमेंट हैड डॉ. एसके माहला और सीनियर लैक्चरर अरविंद बिर्दी की मदद से उन्होंने इसे तैयार किया है। वरुण सैनी ने बताया डीजल से प्रदूषण फैलता है, जिसका हैल्थ पर बुरा प्रभाव पड़ रहा है। इससे बचने के लिए उनके दिमाग में बॉयोडीजल आइडिया आया। बायोडीजल बनाने के लिए उन्होंने वेस्ट हुए तेल, सब्जी बनाने वाले तेल का उपयोग किया है।

इसमें एक लीटर लिंसिड आयल, 30 प्रतिशत मैथेनेंट आयल और कॉस्टिक सोडा को तीन घंटे तक 60 से 65 डिग्री तक एक कंटेनर में डाल कर पकाया गया। इसके बाद इसमें से वेस्ट मटीरियल और तेल को अलग किया गया। बायोडीजल तैयार हो गया। डॉ. एसके माहला ने बताया इंस्टीच्यूट में पिछले तीन सालों से एक बेकार महिंद्रा जीप खड़ी थी। उन्होंने सोचा क्यों न बॉयोडीजल का प्रयोग इसमें किया जाए।

उन्होंने आधे डीजल और आधे बॉयोडीजल का मिश्रण कर इसको चलाया। इसकी एवरेज 10 किलोमीटर प्रति लीटर साबित हुई। डीजल से चलने वाली गाड़ियों के मुक ाबले यह 90 प्रतिशत प्रदूषण को कम करता है। जीप में पुराना इंजन होने के बावजूद भी यह जल्दी स्टार्ट हो जाती है।

इसमें वाइब्रेशन भी बहुत कम होती है। उन्होंने कहा बॉयोडीजल को घर में तैयार किया जा सकता है। इसके लिए कुकिं ग और वेस्ट आयल को किसी तीन घंटे तक पकाया जाता है, बाद में गर्म पानी से धोया जाता है जिससे वेस्ट मटीरियल नीचे रह जाता है। पकाने के बाद जो तेल ऊपर आ जाता है और जो मटीरियल नीचे रह जाता है उससे ग्लिसरीन भी बनाई जा सकती है जिसे सोप इंडस्ट्री को दिया जा सकता है।

डॉ. माहला ने बताया कि वे बॉयोडीजल का प्लांट लगाना चाहते हैं ताकि इससे बढ़ते पॉल्यूशन को रोका जा सके और डीजल की खपत कम हो सके। इसके लिए उन्होंने सरकार से सहायता मांगी है।





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