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गोल्डन गर्ल की स्ट्रगल

जालंधर. विश्व में गोल्डन गर्ल ऑफ एशिया के नाम से विख्यात राजबीर कौर हॉकी के मैदान से चाहे दूर हो गई हैं लेकिन हॉकी के प्रसार के लिए उनका संघर्ष अब भी जारी है। अपने इकलौते भाई की याद और लुप्त होती जा रही हाकी को बचाने के लिए राजबीर कौर ने एक शो मैच से शुरुआत की जो अब एक टूर्नामैंट की शक्ल अख्तियार कर चुका है।

तमाम मुश्किलों और किसी स्पांसर के न होने के बावजूद हर वर्ष राजबीर कौर अपने पति ओलंपियन गुरमेल सिंह गेली और पारिवारिक सदस्यों के सहयोग से टूर्नामैंट करा रही हैं। राजबीर कौर का इकलौता भाई जगबीर सिंह जग्गी भी बहन के ही नक्शे कदम पर था और पंजाब पुलिस की तरफ से ऑल इंडिया पुलिस एवं नैशनल हॉकी में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर रहा था 1991 में वह इस नश्वर संसार से विदा ले गया। इकलौते भाई का दुनिया से चले जाना राजबीर के लिए वज्रपात था लेकिन राजबीर ने हिम्मत नहीं हारी।

हॉकी राजबीर का पहला प्यार था तो जग्गी जिंदगी का अहम हिस्सा था। जग्गी की याद और हाकी को बचा कर रखने के उद्देश्य से राजबीर कौर ने हॉकी टूर्नामैंट करवाने की ठान ली। संसाधनों की कमी थी, लिहाजा शुरुआत प्रदर्शनी मैच से की गई। एक अरसे के बाद राजबीर कौर टूर्नानैंट करवाने में सफल रही। पिछले पांच वर्षो के दौरान हर बरस टूर्नामैंट करवाने के लिए जद्दोजहद होती है, क्योंकि कोई स्पांसर ही नहीं मिल पाता। एक वर्ष तो टूर्नामैंट करवाया ही नहीं जा सका।

बावजूद इसके राजबीर कौर का संघर्ष लगातार जारी है और इस बार भी कुछ पारिवारिक एनआरआइ के सहयोग से 10 अक्तूबर से खुसरोपुर में टूर्नामैंट करवाया जा रहा है। बकौल राजबीर कौर, टूर्नामैंट करवाने से जगबीर का नाम तो जिंदा रहेगा, पर संतुष्टि इस बात की है कि जगबीर के नाम पर करवाए जाने वाले टूर्नामैंट से हाकी को भी लोकप्रियता मिल रही है चाहे यह अभी तक स्थानीय स्तर की है। अंडर-15 वर्ग के मुकाबले करवाने के पीछे भी उद्देश्य यही है कि युवा पीढ़ी हाकी की तरफ आकर्षित हो सके।





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