जयपुर. प्रदेश भाजपा का मुखपत्र ‘भाजपा राजस्थान’ उस सीमा तक ही झांसी की रानी लक्ष्मी बाई के साथ है, जहां तक वह अंग्रेजों के साथ लड़ी। 1857 के स्वतंत्रता संग्राम में रानी लक्ष्मी बाई के योगदान को यशस्वी बनाने वाली सुभद्राकुमारी चौहान की कालजयी कविता ‘झांसी की रानी’ भाजपा के मुखपत्र में जगह तो पा गई, लेकिन जब रचयिता इसे ग्वालियर राजघराने की तरफ ले गई तो भाजपा उनके कदम वापस खींच लाई। इस कमी को आरएसएस की प्रदेश इकाई के मुखपत्र ‘पाथेय कण’ ने पूरा कर दिया।
क्या छपा, क्या नहीं? : मुख्यमंत्री विरोधी गुट का आरोप है कि मुखपत्र में ‘सिंहासन हिल उठे राजवंशों ने भृकुटी तानी थी, बूढ़े भारत में आई फिर से नई जवानी थी’ कविता तीन अंकों में प्रकाशित की जाती रही, लेकिन वह अंश प्रकाशित नहीं किया गया, जिसमें सिंधिया राजघराने की अंग्रेज भक्ति को लेकर व्यंग्य किया गया है।
ये पंक्तियां नहीं छपीं
अंग्रेजों के मित्र सिंधिया..
रानी बढ़ी कालपी आई, कर सौ मील निरंतर पार।
घोड़ा थककर गिरा भूमि पर गया तत्काल स्वर्ग सिधार।
यमुना तट पर अंग्रेजों ने फिर खाई रानी से हार।
विजयी रानी आगे चल दी, किया ग्वालियर पर अधिकार।
अंग्रेजों के मित्र सिंधिया ने छोड़ी राजधानी थी।
बुंदेले हरबोलों के मुंह हमने सुनी कहानी थी।..
संघ ने साधा ग्वालियर घराने पर निशाना
भाजपा की राजस्थान इकाई के उलट आरएसएस की प्रदेश इकाई के मुखपत्र ‘पाथेय कण’ के हाल ही प्रकाशित ‘1857 की क्रांति कथाएं’ विशेषांक अंक में ‘शौर्य की साक्षात् प्रतिमा महारानी लक्ष्मीबाई’ ग्वालियर के सिंधिया राजघराने पर सीधा निशाना साधा है।
संघ की स्थानीय इकाई के कार्यकर्ता ललित मोहन शर्मा लिखित लेख में कहा गया है : ‘अंग्रेजों के मित्र राजा जियाजी राव सिंधिया को ग्वालियर छोड़कर आगरा भागना पड़ा।’ इस पंक्ति को बोल्ड अक्षरों में छापा गया है।
‘पाथेय कण’ के विशेषांक में सुभद्राकुमारी चौहान की कविता का हालांकि एक हिस्सा ही छपा है, लेकिन इसमें ‘विजयी रानी आगे चल दी, किया ग्वालियर पर अधिकार। अंग्रेजों के मित्र सिंधिया ने छोड़ी राजधानी थी’ वाला अंश शामिल दिया गया है। इसे विभिन्न कार्यक्रमों में बंटवाया भी जा रहा है।
सिंधिया का लक्ष्मीबाई पर आक्रमण
‘पाथेय कण’ के विशेषांक में प्रकाशित एक अन्य लेख ‘अजेय सेनानी तात्या टोपे’ में कहा गया है कि जयाजी राव सिंधिया ने जो सेना महारानी लक्ष्मीबाई, राव साहब पेशवा और तात्या टोपे पर आक्रमण के लिए भेजी थी, उसे तात्या ने चमत्कार दिखाते हुए पूरी की पूरी अपने साथ कर ली थी।
* आपने मुझे सूचना दी है। अब मैं जानकारी करूंगा कि कविता का कितना अंश ‘भाजपा राजस्थान’ में छपा है और कितना नहीं। इसकी क्या वजह रही है।
डॉ. महेशचंद्र शर्मा, प्रदेश अध्यक्ष, भाजपा
* मेरा खयाल है कविता पूरी छप गई है। एक-दो अंक में ब्रेक आ गया होगा। आपको पूरी कविता चाहिए तो वह हमारे यहां फोटोस्टेट उपलब्ध है।
शंकर अग्रवाल, प्रदेश अध्यक्ष, प्रकाशन प्रकोष्ठ, भाजपा
* ‘झांसी की रानी’ का ग्वालियर के राजघराने से संबंधित अंश क्यों नहीं छापा गया, यह सवाल मुझसे नहीं शंकर अग्रवाल से पूछिए। वे ही सामग्री का चयन करते हैं।
प्रकाशचंद्र, प्रधान संपादक, भाजपा राजस्थान