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जन्म से सुन नहीं पा रहा था, सर्जरी ने सुनाई आवाज

जयपुर. जन्मजात बहरापन अब लाइलाज नहीं रहा। राजस्थान में पहली बार एक बच्चे के कान का ऑपरेशन करके उसके सुनने की शक्ति लौट आई है। ऑपरेशन earविख्यात ईएनटी विशेषज्ञ डॉ. नीरज कासलीवाल और दिल्ली से आए डॉ. अमित किशोर ने फोर्टिस एस्कॉर्ट अस्पताल में २३ सितंबर को किया था। उन्होंने बच्चे को ऑस्ट्रेलिया से आयात कोक्लियर इंप्लांट नामक यंत्र लगाया, जिस पर ९.४८ लाख रु. का खर्च आया। शास्त्री नगर के बिजनेसमैन राकेश गुप्ता का पुत्र विशाल (५) बचपन से ही सुन नहीं पाता था। इससे वह बोल भी नहीं पाता था। ऑपरेशन के बाद उसके सुनने की क्षमता में परिवर्तन हुआ है। फिलहाल बच्चे के कानों पर पट्टी बंधी हुई है। बाद में डॉक्टरों की टीम स्पीच थैरेपी से बच्चे को बोलना सिखाएगी।

क्या है कोक्लियर इंप्लांट
यह एक इलेक्ट्रॉनिक यंत्र है, जिसे सर्जरी के जरिए कान के पीछे वाले हिस्से में लगाया जाता है। इसका एक हिस्सा कान के अंदर और दूसरा हिस्सा ‘प्रोसेसर’ कान के बाहरी हिस्से में लगाया जाता है। बाहर वाले कंपोनेंट में एक माइक्रोफोन होता है जो आवाज को साउंड प्रोसेसर तक भेजता है। यह इसे कोड सिग्नल में बदलकर रेडियो ट्रांसमिशन के रूप में अंदर वाले कंपोनेंट को पहुंचाता है। इस कंपोनेंट में एक इलेक्ट्रोनिक चिप लगी होती है, जो कोड सिग्नल को इलेक्ट्रिक सिग्नल में बदल कर कान के अंदर वाले कंपोनेंट में लगे इलेक्ट्रोड्स को भेज देती है। इलेक्ट्रोड्स इन सिग्नल को मस्तिष्क तक पहुंचाते हैं और आवाज व्यक्ति के सुनने की नसों तक पहुंच जाती है।

विशेष ट्रेनिंग की जरूरत
डॉ. कासलीवाल ने बताया कि यह ऑपरेशन करने के लिए डॉक्टरों को भी विशेष ट्रेनिंग और विशेष ऑपरेशन थिएटर की जरूरत होती है। इस ऑपरेशन में सहायता के लिए ऑस्ट्रेलियन कंपनी ने दिल्ली से डॉ. अमित किशोर को जयपुर भेजा था। भारत में कोक्लियर इंप्लांट की ज्यादा कीमत के कारण लोग इसे एक कान में ही लगवाते हैं।

5 से 10 लाख कीमत
कोक्लियर इंप्लांट का उत्पादन 1982 में ऑस्ट्रेलिया में शुरू हुआ था। अब यह अमेरिका, फ्रांस, ऑस्ट्रिया में भी हो रहा है। इस डिवाइस के तीन अलग-अलग मॉडलों की कीमत 5.12 लाख रुपए से 9.48 लाख रुपए है। भारत में पहली बार यह यंत्र 1996 में नई दिल्ली के एम्स में लगाया गया था। तीन वर्ष पहले विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने नई दिल्ली के नेवी हॉस्पिटल में इलेक्ट्रोड्स के उत्पादन के प्रयास शुरू किए थे, मगर वह सफल नहीं हो सका।





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