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न ‘जन’, न सुनवाई

जयपुर. कार्यक्रम का नाम तो है ‘जन सुनवाई’ पर मौके पर न तो जन होते हैं और न सुनवाई। यह हाल है जेडीए में चल रहे जन सुनवाई कार्यक्रम का। इसमें hearingअफसरों की अनुपस्थित रहने की आदत से लोगों ने भी आना बंद कर दिया है।

आम लोगों की समस्याएं सुनकर ुउनको राहत पहुंचाने के लिए शुरू किए गए इस कार्यक्रम में क्या हो रहा है, यह जानने के लिए भास्कर टीम ने दो घंटे तक मौके पर कार्यवाही देखकर असलियत जानी—

अफसरों को बोझ लगता है
प्रशासन ने बाकायदा आदेश निकाल कर अधिकारियों की दिनवार ड्यूटी लगाई हुई है, लेकिन उनको कोई परवाह नहीं। अलग-अलग शाखाओं से संबंधित दस अधिकारियों की रोजाना 2.30 से 4.30 बजे तक यहां बैठकर लोगों की समस्याएं सुनने की ड्यूटी है, लेकिन सोमवार को दस में से सिर्फ तीन अधिकारी उपस्थित थे। अतिरिक्त आयुक्त (एलपीसी), उपायुक्त जोन-1, उपायुक्त जोन-2, प्रवर्तन अधिकारी जोन-1, प्रवर्तन अधिकारी जोन-2, जोनल अभियंता-1 और जोनल अभियंता-2 कार्यक्रम से नदारद थे। पूछने पर उन्होंने यह कहकर पल्ला झाड़ लिया कि वे किसी दूसरे जरूरी काम में व्यस्त थे।

नोटिस के बावजूद नहीं सुधरे
पिछले दिनों जेडीए सचिव ने कार्यक्रम से गायब रहने वाले जोन उपायुक्तों और प्रवर्तन अधिकारियों को नोटिस भी जारी किए। कुछ दिन तो व्यवस्था सुधरी, लेकिन अब फिर वही चाल है।

1700 शिकायतें लंबित
तय समय में निस्तारण नहीं होने से जन सुनवाई कार्यक्रम में आई 1701 शिकायतें अब भी पेंडिंग हैं। इनमें दोहरे पट्टे, सड़क, नाली और सीवर के साथ-साथ अतिक्रमण की शिकायतें शामिल हैं। लंबित शिकायतों में अकेले सहकारिता प्रकोष्ठ से संबंधित 1041 शिकायतें हैं।

* जन सुनवाई में अनुपस्थित रहने वाले अफसरों के बारे में प्रशासन को कई बार लिखा जा चुका है। निर्देश पर हालात सुधरते हैं, लेकिन कुछ दिन बाद फिर वही स्थिति हो जाती है। हालांकि हम लोगों की समस्या हल करने के लिए हरसंभव प्रयास करते हैं, शिकायत का निस्तारण होने पर डाक से सूचना भी भिजवाते हैं।
—जगमोहन श्रीवास्तव, विशेषाधिकारी (जनसुनवाई)

* जन सुनवाई कार्यक्रम के रिकॉर्ड की जांच करवाई जाएगी। जिन अफसरों ने कोताही बरती है, उनको कारण बताओ नोटिस जारी कर कार्रवाई करेंगे।
—आरएन मीणा, सचिव, जयपुर विकास प्राधिकरण





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