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नक्सलियों को 10 किलोमीटर पीछे धकेला

रायपुर. नक्सलियों के खिलाफ पुलिस की ताजा कामयाबी फिलहाल सीमित इलाकों में है, इसलिए प्रचार नहीं किया जा रहा है। उच्चपदस्थ सूत्रों के मुताबिक बीजापुर के एक हिस्से में नक्सली ठिकानों और तंत्र को फोर्स ने जंगल के भीतर 10 किमी तक रौंद डाला है। छत्तीसगढ़ पुलिस और सीआरपीएफ के कैंप धुर नक्सल प्रभावित भोपालपटनम से कुछ दूर हैं।

फनल जैसा प्लान लेकर आगे बढ़ रही फोर्स को भोपालपटनम में आपरेशन शुरू करने के लिए ज्यादा जवानों की जरूरत है। पुलिस मुख्यालय इसके लिए केंद्र से फोर्स मांगने की तैयारी में जुट गया है। पुलिस का यह आपरेशन खुफिया नहीं है। अफसरों ने तय किया था कि जब तक कोई ठोस और बड़ी कामयाबी हासिल नहीं हो जाती, इसे प्रचारित नहीं किया जाएगा।

इस मामले में डीजीपी विश्व रंजन का यही कहना है कि फोर्स एक अलग रणनीति पर काम कर रही है। किसी सूचना पर सीधे भीतर जाकर आपरेशन करने से जाते या लौटते समय फोर्स पर बड़े हमले हुए हैं। इसमें नुकसान भी हुआ है। इसलिए बेहतर यही है कि घेरा बनाकर धीरे-धीरे बढ़ा जाए।

फोर्स की अचानक डिमांड :
छत्तीसगढ़ पुलिस एक बार फिर केंद्र से फोर्स की मांग करने जा रही है। इसका प्रस्ताव जल्द भेजा जाएगा। पुलिस अफसर कहते रहे हैं कि यहां फोर्स की जरूरत नहीं है। फिर अचानक जरूरत क्यों आन पड़ी? इस सवाल पर एक अफसर ने इशारा किया कि दक्षिण बस्तर के ताजा आपरेशन में ज्यादा फोर्स लगेगी।

भीतर घुसकर फोर्स ने जिन इलाकों में नक्सली गतिविधियों को काबू में कर लिया है, वहां यथास्थिति बनाए रखने के लिए भी फोर्स चाहिए और आपरेशन को आगे बढ़ाने के लिए भी। छत्तीसगढ़ के पास इतनी फोर्स नहीं है कि दोनों काम एक साथ कर लिए जाएं।

जुड़ूम क्षेत्रों में कामयाबी
यह आपरेशन कई पाकेट्स में चल रहा है। जहां सलवा जुड़ूम आंदोलन चल रहा है, वहां फोर्स को रिस्पांस अच्छा मिला है। जहां नहीं है, वहां फोर्स सावधानी बरत रही है। फ्रंट में तैनात सभी कंपनियों को निर्देश दिए गए हैं कि सूचना मिलने पर जंगल में ज्यादा अंदर नहीं जाना है।

जहां कैंप लगे हैं, वहां सतर्कता बरती जा रही है। बड़ा इलाका खाली होने के बावजूद नक्सलियों ने पिछले 10 दिन में फोर्स कैंपों पर फायरिंग की आधा दर्जन से ज्यादा कोशिशें की हैं, लेकिन जवाबी हमले में उन्हें भागना पड़ा।





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