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हाईकोर्ट ने कहा- फोर्स बढ़ाएं और ट्रैफिक सुधारें

बिलासपुर. हाईकोर्ट के कार्यवाहक चीफ जस्टिस जगदीश भल्ला व जस्टिस सतीश अग्निहोत्री की डबल बेंच ने मंगलवार को डीएसपी ट्रैफिक और आरटीओ को शहर का ट्रैफिक तत्काल दुरुस्त करने के आदेश दिए। उन्होंने ट्रैफिक फोर्स बढ़ाने के लिए कार्रवाई करने कहा और एसपी को फोर्स की जानकारी के साथ हाईकोर्ट में उपस्थित होने के निर्देश दिए।

शहर में सड़क, पानी, बिजली, यातायात, साफ-सफाई की दुर्दशा को लेकर हाईकोर्ट में लगी याचिका पर मंगलवार को फिर सुनवाई हुई। कोर्ट ने अस्त-व्यस्त ट्रैफिक और सड़क किनारे बसों की अवैध पार्किग के मुद्दे पर डीएसपी ट्रैफिक सुशील डेविड, आरटीओ जेएल पैकरा को तलब किया था। जस्टिस द्वय ने श्री पैकरा से कहा कि वे तत्काल बस स्टैंड की स्थिति सुधारें।

यहां बाहर सड़क से जो बसें संचालित की जा रही हैं, उस पर तुरंत रोक लगाएं। श्री डेविड को निर्देश दिए गए कि मामा-भांजा तालाब के पास बसों की पार्किग रोकने के लिए कड़ी कार्रवाई करें, साथ ही शिव टाकीज-बस स्टैंड मार्ग के किनारे खड़ी की जाने वाली बसों पर भी कार्रवाई करें।

उन्होंने जब ट्रैफिक में फोर्स की कमी की बात कही तो कोर्ट ने फोर्स की विस्तृत जानकारी के साथ एसपी प्रदीप गुप्ता को हाईकोर्ट में हाजिर होने के लिए कहा। कोर्ट का कहना है कि ट्रैफिक में कम से कम 100 कर्मचारियों का बल रहना चाहिए।

कोर्ट ने जब आरटीओ व डीएसपी ट्रैफिक से अभी तक चालान की कार्रवाई की आंकड़ा पूछा तो दोनों अधिकारी सही जवाब नहीं दे सके। डबल बेंच ने रायपुर रोड (नेशनल हाईवे 200) की दुर्दशा के मुद्दे पर एनएच के ईई और तालाबों के रख-रखाव के लिए निगम कमिश्नर एम ए हनीफी को भी तलब किया था।

कोर्ट ने इन अधिकारियों से पूछा कि सड़कें क्यों नहीं बन रही हैं? ईई ने कोर्ट को बताया कि एनएच की मरम्मत के लिए केंद्र सरकार से राशि मिलती है, लिहाजा राशि आने का इंतजार किया जा रहा है। निगम कमिश्नर ने तालाबों का रख-रखाव तुरंत प्रारंभ करने की बात कही।

मामा-भांजा तालाब में न आए गंदा पानी
डबल बेंच ने निगम आयुक्त एमए हनीफी को आदेश दिया कि रेलवे क्षेत्र का जो गंदा पानी मामा-भांजा तालाब में आ रहा है, उसे तत्काल रोकें। रेलवे के गंदे पानी की निकासी की कोई वैकल्पिक व्यवस्था करें। कोर्ट ने राज्य शासन को निर्देश दिया कि वे बताएं कि तालाबों के संरक्षण के लिए उनके पास क्या योजना है।

पारले बिस्किट में कागज निकलने का मामला खारिज
बिस्किट में कागज निकलने और उसके सेवन से एक बच्ची के बीमार होने का मामला हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया। सन 2002 में रायपुर जिले के बलौदा बाजार निवासी एस सी श्रीवास्तव ने वहीं के पिंकी जनरल स्टोर से पारले बिस्किट का पैकेट खरीदा। उनकी पांच साल की बेटी ने इस पैकेट के बिस्किट खाए। इसके बाद उसे उल्टियां होने लगी।

घरवालों ने देखा तो पैकेट के बिस्किट में कागज के टुकड़े थे। इसके बाद श्री श्रीवास्तव ने कंज्यूमर फोरम में मामला दायर किया। इसके जवाब में पारले कंपनी ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर इस मामले को समाप्त करने की मांग की थी।

कंपनी के वकील का कहना था कि कंज्यूमर फोरम में जिन धाराओं के अंतर्गत मामला दर्ज किया गया है, वह गलत है। कोर्ट ने यह तर्क मानते हुए। मामला खारिज करने के आदेश दिए।





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