न्यूयार्क/ नई दिल्ली: वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने कहा है कि रुपए की मजबूती के इस दौर में सरकार निर्यातकों को करों में राहत दे सकती है। वाशिंगटन में चिंदबरम ने कहा कि रुपए के कारण परेशानी हो रही है और उनके बस में होता तो वे राजकोषीय उपाय से स्थिति ठीक कर देते। वित्त मंत्री के इस बयान का एक अर्थ यह भी है कि सरकार निर्यातकों को सब्सिडी वाले लोन और टैक्स में कटौती उपलब्ध करा सकती है। निर्यात करने वाली कंपनियां भारत के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में एक तिहाई योगदान करती हैं।
चिदंबरम ने कहा कि रुपया पूरे एशिया में सबसे ज्यादा सुधरा है। पिछले साल रुपया 11.4 फीसदी बढ़ा है। अब यह असुविधाजनक हो गया है। जेपी मार्गन के अर्थशास्त्री राजीव मलिक का कहना है कि सरकार के वित्तीय कदमों की भी एक सीमा है। कपड़े जैसे श्रम बहुत उद्योग में मजदूरों पर असर सरकार को चौंका सकता है।
चिदंबरम ने विश्वास जाहिर किया कि इस साल विकास दर 8.5 फीसदी रहेगी। भारतीय निर्यात पर मजबूत रुपए का क्या असर होगा, यह अनुमान लगाना मुश्किल है। चिदंबरम ने कहा कि उन क्षेत्रों की पहचान की जा रही है, जिनमें निर्यात की मात्रा और रोजगार दोनों प्रभावित होंगे।
सेंटर फार मीडिया स्टडीज के विश्लेषक एन भास्कर राव का कहना है कि चुनाव मई में हो सकते हैं। सरकार रोजगार पर कोई असर नहीं पड़ने देना चाहेगी। टेक्सटाइल, जेम्स, लेदर और हैंडीक्राफ्ट में करीब एक करोड़ लोगों को रोजगार मिला हुआ है। कृषि के बाद इसमें सबसे ज्यादा लोग काम करते हैं। फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्टर्स इन न्यू डेल्ही के प्रसिडेंट गणोश कुमार का कहना है कि रुपए में मजबूती रहती है तो लोगों के रोजगार खत्म होंगे।
भारत की साफ्टवेयर कंपनियां 60 फीसदी सेवाएं अमेरिका को बेचती हैं। मजबूत रुपए के कारण उनके मुनाफे और मार्जिन में कमी आ सकती है। टीसीएस के शेयरों में 15 फीसदी कमी आ चुकी है। नास्काम के प्रेसिडेंट किरण कर्णिक का कहना है कि रुपए की मजबूती आईटी उद्योग के लिए अच्छी खबर नहीं है।