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एचडीएफसी ने होम लोन (फ्लोटिंग) ब्याज दर घटाकर 10.5 फीसदी कर दी है। केवल 31 अक्टूबर तक चलने वाले इस ऑफर में नए डिस्बर्समेंट पर सालाना 10.5 फीसदी ब्याज वसूल किया जाएगा। लोन के जो प्रस्ताव मंजूर हो गए हैं, लेकिन डिस्बर्स नहीं हुए हैं, उन पर भी 10.5 फीसदी ब्याज दर लागू होगी। एचडीएफसी का ऑफर उन लोगों के लिए आकर्षक है जो निजी बैंकों को 11.5 से 12 फीसदी फ्लोटिंग ब्याज दर चुका रहे हैं। वे री-फाइनेंस का रास्ता अपना सकते हैं। मानाकि आप पर 30 लाख रुपए लोन बकाया है। इसे चुकाने की अवधि 15 साल बची है व 12 फीसदी की फ्लोटिंग दर से आप लोन चुकाते हैं। इसकी ईएमआई लगभग 36 हजार रुपए मासिक है। आप एचडीएफसी से री-फाइनेंस का सहारा ले सकते हैं। री-फाइनेंसिंग सुविधा यानी एक तरह से सस्ते दर पर नए लोन की सुविधा है जिसमें पुराने लोन को नए के तरीके से चुकाया जाता है। किसी और बैंक से लोन लेकर मौजूदा बैंक को पुराना लोन चुकाते समय 2 फीसदी पAी-पेमेंट चार्ज दंड स्वरूप भरना पड़ता है। जैसे कि आपका बकाया लोन 30 लाख है तो आपको 60 हजार पAी-पेमेंट चार्ज देना होगा। क्या री-फाइनेंस फायदेमंद है?
कोई ऋणगAाही (लोन गAाहक) 30 लाख रुपए बकाया होम लोन पर मासिक 36 हजार रुपए ईएमआई भर रहा हो और उसे 12 फीसदी ब्याज दर वाला लोन 15 साल तक चुकाना है। वह री-फाइनेंस सुविधा का सहारा लेता है तो फिर फ्लोटिंग दर 12 फीसदी सालाना की जगह 10.5 फीसदी हो जाएगी। गAाहक वही ईएमआई (36 हजार रुपए मासिक) चुकाना जारी रखता है तो उसे 30 लाख रुपए के लोन पर 15 साल की जगह केवल साढ़े 12 साल ही लोन चुकाना होगा। यानी 180 माह (15 साल) के बदले उसे केवल 150 महीने (12.5 साल) ही लोन चुकाना होगा। गAाहक को 30 महीने की बचत हो जाएगी।
कितना बचाएंगे आप?मासिक लोन रकम 36,000 रुपए में 30 महीने का गुणा करने पर यह रकम 10.8 लाख रुपए होती है। यानी 60 हजार रुपए का पAी-पेमेंट चार्ज भर कर 10 लाख से भी अधिक रकम बचाई जा सकती है। माना कि ब्याज दर 10.5 फीसदी है तो री-फाइनेंस सुविधा अपनाना काफी लाभदायक होगा। ऐसा नहीं है कि री-फाइनेंस ब्याज दर में कोई बदलाव नहीं होगा। यह बैंकों और फाइनेंस कंपनियों के बेंचमार्क पAाइम लेंडिंग रेट (बीपीएलआर) पर निर्भर करता है। यदि बीपीएलआर 13.5 फीसदी निर्धारित करता है और फ्लोटिंग ब्याज दर में 1.5 फीसदी की छूट देता है तो भी ब्याज दर सालाना 12 फीसदी होगी।
वर्तमान ब्याज दर (फ्लोटिंग) में 1 फीसदी की बढ़ोतरी होती है तो वह 13 फीसदी हो जाएगा। वहीं री-फाइनेंसिंग वाले लोन में भी बढ़ोतरी होगी और वह 10.5 फीसदी की जगह 11 फीसदी सालाना हो जाएगा। यानी दोनों लोन की दर में लगभग 1.5 फीसदी का अंतर बरकरार रहेगा।